सागर- गोविंद–भूपेंद्र पर क्या बोले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ? |SAGAR TV NEWS|
सागर में बीजेपी के दो दिग्गज नेताओं गोविंद सिंह और भूपेंद्र सिंह के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को लेकर अब प्रदेश नेतृत्व खुलकर सामने आ गया है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए साफ कहा है कि कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच मनमुटाव सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संगठन, विचारधारा और क्षेत्रीय विकास के लिए भी नुकसानदायक साबित होता है। सागर में गोविंद सिंह और भूपेंद्र सिंह के बीच जारी खींचतान लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी को लेकर जब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से सवाल किया गया कि क्या दोनों नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई है, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संगठन की एकता को सर्वोपरि बताया।
हेमंत खंडेलवाल ने कहा, “कार्यकर्ताओं के बीच मनमुटाव सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं करता, बल्कि पार्टी, उसकी विचारधारा और उस क्षेत्र के विकास को भी प्रभावित करता है। मेरा प्रयास सिर्फ सागर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के हर जिले में यही है कि जहां दूरी दिखाई दे, वहां संवाद हो, मतभेद कम हों और संगठन में एकजुटता बने। प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी साफ किया कि बीजेपी में अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने संकेत दिए कि यदि कोई भी व्यक्ति या नेता संगठन की एकता को नुकसान पहुंचाता है और स्थिति सिर से ऊपर जाती है, तो पार्टी सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि जब बीजेपी चुनावी मैदान में उतरती है, तो संगठन की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है। आपसी मतभेद, गुटबाजी और सार्वजनिक बयानबाजी पार्टी के लिए नुकसानदायक होती है, जिसका असर सीधे कार्यकर्ताओं के मनोबल और जनता के भरोसे पर पड़ता है। प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद सागर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संगठन स्तर पर सागर के विवादित नेताओं के बीच सुलह की कोशिशें और तेज हो सकती हैं। वहीं यह संदेश भी साफ है कि बीजेपी नेतृत्व अब किसी भी तरह की अंदरूनी कलह को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। कुल मिलाकर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान साफ संकेत देता है कि संगठन में अनुशासन, संवाद और एकजुटता ही आगे की राजनीति की दिशा तय करेगी। अब देखना यह होगा कि सागर में चल रहा गोविंद–भूपेंद्र विवाद किस मोड़ पर पहुंचता है और पार्टी नेतृत्व इसे कैसे सुलझाता है।