Sagar- चार दिन पहले जंगल में मृत मिला था बाघ, अब DFO को नोटिस, 3 दिन में माँगा जबाव
सागर के नौरादेही में बाघ की मौत के मामले में टाइगर रिजर्व के डीएफओ को नोटिस जारी किया गया है. डीएफओ को 3 दिन के अंदर इस मामले में जवाब देना होगा. वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने रेडियो कॉलर पहने हुए बाघ की मौत को लेकर कई सवाल खड़े किए थे. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने नौरादेही टाइगर रिजर्व के डीएफओ रजनीश कुमार सिंह को नोटिस जारी किया गया.
15 फ़रवरी की शाम को नौरादेही टाइगर रिजर्व में कान्हा से महीने भर पहले आया बाघ मृत अवस्था में मिला था. यह बात सामने आई थी कि लगातार 2 दिन तक एक ही जगह लोकेशन पाए जाने के बाद जब वन अमले ने जाकर देखा, तो बाघ मारा हुआ था. पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट में बाघ की मौत का कारण टेरिटोरियल फाइट बताया गया है. बाघ को 18-19 जनवरी की दरमियानी रात रेडियो कॉलर लगाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के में छोड़ा गया था. तब से ही उसकी लगातार मॉनीटरिंग कर रहे थी.
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने अपनी शिकायत में कहा था कि एक रेडियो-कॉलर वाले बाघ का मृत पाया जाना और आधिकारिक प्रेस नोट कई संदेहास्पद प्रश्न खड़े करता है. 2 दिनों तक स्टैटिक अलर्ट की अनदेखी क्यों की गई? रेडियो कॉलर से हर 8 घंटे में मिलने वाले स्टैटिक अलर्ट यह संकेत देते हैं कि बाघ की गतिविधि रुक गई है. उन्हें 2 दिनों तक नजरअंदाज क्यों किया गया?
अजय दुबे ने शिकायत में पूछा है कि निगरानी टीम को संघर्ष की भनक क्यों नहीं लगी? बाघों की क्षेत्रीय लड़ाई की आवाज या हलचल निगरानी टीमों द्वारा अनसुनी कैसे रह गई. इस फाइट में शामिल दूसरा बाघ वर्तमान में कहाँ है? क्या अन्य बाघ भी खतरे में हैं? क्या यह लापरवाही इलाके के बाकी 3-4 कॉलर वाले बाघों की सुरक्षा को भी जोखिम में डालती है? इस निगरानी चूक के लिए तत्काल जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है
उन्होंने मांग की है कि जिम्मेदार स्टाफ को निलंबित कर जांच हो