चमत्कारी मंदिर, मुस्लिम बस्ती के बीच गूंजती जय माता दी, 1500 साल से कायम है एकता की मिसाल
नवरात्र के पावन मौके पर जबलपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी पेश करती है। मामला है जबलपुर के चारखंबा क्षेत्र में स्थित बूढ़ी खेरमाई देवी मंदिर का। करीब 1500 साल पुराना यह मंदिर चारों ओर से मुस्लिम बस्ती से घिरा हुआ है, लेकिन यहां हर धर्म के लोग एक साथ सिर झुकाते नजर आते हैं। गोंडवाना काल से पूजी जा रही खेरमाई माता को धूमावती देवी का स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। मंदिर में नारियल चढ़ाने की अनोखी परंपरा भी है—कहा जाता है कि मनोकामना पूरी होने पर नारियल अपने आप गिर जाता है।
नवरात्र के दौरान यहां निकलने वाला जवारा जुलूस खास आकर्षण का केंद्र होता है। भक्त अपनी आस्था दिखाने के लिए बाना गालों में छेद कर इस जुलूस में शामिल होते हैं—जो श्रद्धा और विश्वास का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। इस बार खास बात यह है कि नवरात्र के साथ रमजान भी चल रहा है। बावजूद इसके मंदिर परिसर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर व्यवस्था संभालते नजर आ रहे हैं। दोनों समुदायों के लोग एक साथ माता रानी के जयकारे लगाते हैं—जो भाईचारे का संदेश देता है। इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण कल्चुरी वंश के राजा कोकल्यदेव ने करवाया था। 1980 में इसका जीर्णोद्धार हुआ और आज भी यहां की मूल प्रतिमा को सुरक्षित रखा गया है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए यहां 24 घंटे पुलिस सुरक्षा तैनात रहती है। स्थानीय लोग भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सक्रिय भूमिका निभाते हैं। बूढ़ी खेरमाई मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं… बल्कि एक संदेश है—जहां धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत और भाईचारा सबसे बड़ा होता है।