कांग्रेस विधायक FD मामले में दोषी करार, 3 साल की सजा, अब विधायकी पर संकट ! | SAGAR TV NEWS |
मध्य प्रदेश के एक कांग्रेस विधायक को उस समय झटका लगा जब 27 साल पुराने एक मामले में MP-MLA कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सजा का एलान किया। जिससे उनकी विधायकी पर संकट गहरा गया है। हालांकि उन्हें जमानत भी मिल गयी है। मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गयी है कई तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं। दरअसल एमपी के दतिया से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की विशेष MP-MLA कोर्ट ने 27 साल पुराने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) घोटाले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने धारा 120B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (जालसाजी) में 3-3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी दोषी ठहराया गया है। उन्हें राहत तब मिली जब सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद अदालत ने उन्हें जमानत भी मंजूर कर दी। बता दें की यह मामला दतिया की जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक से जुड़ा है। जिसमें लंबे समय से धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों की सुनवाई चल रही थी। पहले यह केस ग्वालियर में चल रहा था, जिसे बाद में दिल्ली ट्रांसफर किया गया था।
अदालत ने राजेंद्र भारती को IPC की अलग-अलग धाराओं में दोषी पाते हुए 3 साल की सजा सुनाई। हालांकि कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें जमानत भी दे दी। वकीलों के मुताबिक अपील के लिए 30 से 60 दिन का समय है। हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन मिलने पर विधायकी बरकरार रह सकती है। नहीं तो 2 साल से ज्यादा सजा पर सदस्यता शून्य हो जाएगी।
मिली जानकारी के मुताबिक 24 अगस्त 1998 को राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ने जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक दतिया में 10 लाख रूपये की FD 3 साल के लिए 13.50% ब्याज पर जमा की थी। भारती तब बैंक के अध्यक्ष और श्याम सुंदर जनसहयोग संस्था से जुड़े थे। उन्होंने बैंक लिपिक रघुवीर शरण प्रजापति के साथ लेजर बुक, FD स्लिप और रसीदों में काट-छांट कर अवधि 3 से बढ़ाकर 10 फिर 15 साल कर दी।
इस हेराफेरी से हर साल 1.35 लाख रुपए अतिरिक्त ब्याज मिला। कुल 12 सालों में बैंक को लाखों-करोड़ों का नुकसान हुआ। 2003 में ऑडिट में गड़बड़ी पकड़ी गई। आंतरिक जांच में भारती और उनकी मां दोषी साबित हुए। मामले में बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह की शिकायत पर उपभोक्ता फोरम, दतिया CJM कोर्ट होते हुए मामला दिल्ली MP-MLA कोर्ट पहुंचा। 29 जुलाई 2015 को संयुक्त पंजीयक के निर्देश पर IPC धारा 120B (षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 467/468/471 (जालसाजी) और प्रजापति पर 409 लगी थी। जबकि सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति पर धारा 420, 467, 468, 471, 409 और 120(बी) के तहत मुकदमा चलाया गया।1 अप्रैल 2026 को दिल्ली राउस एवेन्यू कोर्ट ने अभियोजन के साक्ष्यों को संदेह से परे मानते हुए दोनों को दोषी ठहराया।------