जुगाड़ की बिजली ! लकड़ी के खंभों पर दौड़ रही करंट, जान जोखिम में और फिर
एमपी के बालाघाट जिले के दक्षिण बैहर क्षेत्र की ग्राम पंचायत डाबरी से एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां विकास के दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। यहां के गौरझोला, दहियान टोला और कट्टी टोला में रहने वाले आदिवासी ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बिजली के इंतजार में सालों तक उम्मीद लगाए बैठे ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही ‘जुगाड़’ का रास्ता अपनाया। उन्होंने चंदा इकट्ठा कर लकड़ी के बल्लियों को खंभों की तरह खड़ा किया और उन्हीं पर बिजली के तार खींच दिए। इतना ही नहीं, कहीं-कहीं से पुराने सीमेंट पोल मिलते तो उन्हें भी निजी खर्च पर लाकर गाड़ दिया गया।
ग्रामीणों की मेहनत से गांव में बिजली तो पहुंच गई, लेकिन यह सुविधा अब खतरे का रूप ले चुकी है। खुले और लटकते हुए तार हर वक्त हादसे का डर पैदा कर रहे हैं। ये तार घरों के बेहद करीब से गुजरते हैं, जिससे करंट लगने या शॉर्ट सर्किट से आग लगने का खतरा बना रहता है। खासकर बारिश के मौसम में यह जोखिम और बढ़ जाता है। हैरानी की बात यह है कि बिजली विभाग ने गांव में मीटर तो लगा दिए और बिल वसूली भी शुरू कर दी, लेकिन आज तक पक्के खंभे और सुरक्षित लाइन की व्यवस्था नहीं की गई। इससे विभाग की लापरवाही साफ नजर आती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक ओर सरकार ग्रामीण विद्युतीकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर ये गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि डाबरी पंचायत के छापर झोला टोला में आज भी बिजली नहीं पहुंची है और लोग लालटेन व ढिबरी के सहारे जीवन जी रहे हैं। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस खतरे को समय रहते समझेगा या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?