Sagar - समर्थन पर गेहूं बेचने बंपर रजिस्ट्रेशन, बारदाने की कमी से फूल रही सरकार की सांसें
तीन बार गेहूं खरीदी की तारीख बढ़ाने से किसानो में नाराजगी हैं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जहां किसान संगठन सड़कों पर उतर आए हैं तो मंडी में भी कम रेट में गेहूं बिकने से के किसान गुस्से में है और दूसरे राज्यों की तरह जल्द खरीदी शुरू करने की मांग कर रहा है
एक प्रतिष्ठित अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान परिस्थितियों में पहले से वेयर हाउस में 78 लाख टन सरप्लस गेहूं रखा है। करीब 48 लाख टन धान और 10 लाख टन चावल है। सिर्फ 75 से 80 लाख टन और अनाज रखने की कैपेसिटी है। जितने किसानों ने रकबे के हिसाब से उत्पादन और समर्थन मूल्य पर बिक्री का रजिस्ट्रेशन कराया है, करीब 160 लाख टन गेहूं खरीदना पड़ेगा।
यदि पूरा गेहूं सरकार को ही खरीदना पड़ा तो 43 हजार करोड़ रुपए जुटाने होंगे। इधर केंद्र सरकार ने पहले से ही 78 लाख टन खरीदी की सीमा तय कर दी है, लिहाजा 82 लाख टन गेहूं सरप्लस हो जाएगा। वर्ष 2025 का भी सरप्लस गेहूं मिला तो मप्र में डेढ़ करोड़ टन से ज्यादा गेहूं हो जाएगा। इन परिस्थितियों के कारण खाद्य विभाग की सांसें फूली हैं। खाद्य विभाग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि हर साल 30 से 35 लाख टन मप्र से निर्यात होता था। खाड़ी युद्ध के कारण निर्यात बंद है और कीमतें काफी नीचे हैं। इसलिए ज्यादा संभावना है कि पूरा गेहूं समर्थन मूल्य पर सरकार को खरीदना पड़ जाए।
खाद्य विभाग के अधिकारी का कहना है कि कमर्शियल गैस की आपूर्ति थोड़ी बहाल हुई है, इसलिए एचडीपीई बैग भी बनने की सूचना है। चूंकि, खरीदी दस अप्रैल से प्रारंभ हो रही है, तब तक नए बारदाने आने लगेंगे। मप्र को तकरीबन 16 करोड़ बारदानों की जरूरत है।