बांधवगढ़ में फिर बाघ शावक की मौत, आपसी सं घर्ष के दावे पर उठे बड़े सवाल, सच क्या छिपा रहा प्रबंधन?
एमपी के उमरिया जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां बाघों की लगातार हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामले में एक बाघ शावक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, 15 अप्रैल 2026 को पनपथा कोर जोन के बघडो बीट में एक बाघ शावक का शव मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और NTCA प्रोटोकॉल के तहत जांच शुरू की गई। मौके पर डॉग स्क्वॉड बुलाया गया, मेटल डिटेक्टर से सघन सर्चिंग कराई गई और पूरे इलाके की जांच की गई।
इसके बाद वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी और पशु चिकित्सा टीम द्वारा शव का परीक्षण किया गया। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, NTCA प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरे नियमों का पालन करते हुए शावक का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। हालांकि, प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘आपसी संघर्ष’ बताया गया है। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी यही वजह सामने आने पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि जब भी बाघ की मौत होती है, प्रबंधन इसे आपसी संघर्ष बताकर मामले को खत्म करने की कोशिश करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह आपसी संघर्ष है, तो दूसरे बाघ या जानवर का क्या हुआ? क्या वह घायल नहीं हुआ? और अगर हुआ, तो उसकी तलाश क्यों नहीं की जा रही? क्या वन विभाग इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है? फिलहाल, विभाग का कहना है कि पूरे क्षेत्र में हाथियों की मदद से सर्चिंग जारी है और मामले की जांच की जा रही है। लेकिन लगातार हो रही इन मौतों ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि इस बार जांच में क्या सच्चाई सामने आती है, या फिर यह मामला भी पुराने जवाबों में ही दबकर रह जाएगा