MP | 100 साल पुरानी मिठास, जिंदा है फालसा बाग की अनोखी विरासत | SAGAR TV NEWS |
एमपी के बुरहानपुर के रास्तीपूरा क्षेत्र में एक ऐसी अनोखी कहानी जीवित है, जो सिर्फ खेती नहीं बल्कि विरासत, समर्पण और परंपरा की मिसाल बन चुकी है। यहां पतोंडा रोड पर स्थित एक खेत में पिछले करीब 100 सालों से फालसा का बाग आज भी फल दे रहा है। इस बाग की शुरुआत किसान गोपाल पटेल के दादाजी मोतीराम पटेल ने करीब एक सदी पहले की थी। तब से लेकर आज तक तीन पीढ़ियां इस बाग की देखभाल कर रही हैं। खास बात यह है कि बदलते समय के बावजूद इस जमीन पर फालसा के पौधे हर साल उसी तरह फल देते हैं, जैसे पहले देते थे।
फालसा एक ऐसा मौसमी फल है, जो केवल गर्मियों में करीब 20 दिनों के लिए ही उपलब्ध होता है। आकार में छोटा लेकिन गुणों में बड़ा, यह फल शरीर को ठंडक देता है और आयुर्वेद में इसे बेहद लाभकारी माना गया है। पेट की गर्मी, एसिडिटी और कई अन्य समस्याओं में यह कारगर माना जाता है। इस बाग की एक और खासियत यह है कि यहां पूरी तरह प्राकृतिक खेती की जाती है। किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग नहीं होता, बल्कि गोबर खाद से ही पौधों की देखभाल की जाती है। यही कारण है कि इस बाग के फालसा की बाजार में अलग पहचान है और लोग इसे खरीदने के लिए उत्सुक रहते हैं।
हालांकि गोपाल पटेल बताते हैं कि इस बाग से ज्यादा मुनाफा नहीं होता, लेकिन यह उनके लिए सिर्फ खेती नहीं बल्कि पूर्वजों की याद और सम्मान से जुड़ी धरोहर है। करीब 6 एकड़ जमीन होने के बावजूद उन्होंने इस हिस्से को जस का तस रखा है। पूरे इलाके में यह इकलौता फालसा बाग है, जो इसे और भी खास बनाता है। यह कहानी बताती है कि जब परंपरा और समर्पण साथ हो, तो विरासत सिर्फ बचती ही नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक फलती-फूलती भी है।