सड़क पर गूंजी किलकारी, स्वास्थ्य सिस्टम फेल! अस्पताल में इलाज नहीं मिला और फिर
एमपी के बुरहानपुर जिले के शाहपुर से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाला चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक गर्भवती महिला को समय पर इलाज नहीं मिला और मजबूरन उसे सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस घटना ने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, ग्राम दापोरा निवासी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर शाहपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। लेकिन अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ और डॉक्टरों की कमी के चलते महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें तुरंत जिला अस्पताल के लिए निकलना पड़ा, लेकिन रास्ते में ही महिला की डिलीवरी हो गई। सड़क पर हुए इस प्रसव के बाद परिजन महिला और नवजात को वापस शाहपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि, यहां भी समय पर उपचार नहीं मिलने से परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। प्रसूता के पति नरेश गवले ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए और कहा कि अगर समय पर इलाज मिल जाता तो उन्हें इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
गुस्साए परिजनों ने बीएमओ डॉ. अरुण कुमार सिंह को भी जमकर खरी-खोटी सुनाई। हैरानी की बात यह रही कि जब मीडिया अस्पताल पहुंची, तब स्वास्थ्य अधिकारी का कार्यालय खुला, जिससे व्यवस्थाओं पर और सवाल खड़े हो गए। वहीं, बीएमओ डॉ. अरुण कुमार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि महिला को पहले ही जिला अस्पताल रेफर किया गया था और रास्ते में डिलीवरी होने के बाद उसे वापस लाया गया। उन्होंने अस्पताल में स्टाफ की कमी को भी स्वीकार किया और कहा कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत उजागर करती है, जहां संसाधनों की कमी सीधे मरीजों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है।