टेम्परेचर का टॉर्चर, गर्मी बनी बीमारी का कारण, अस्पतालों में मरीजों की बाढ़!
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों गर्मी सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि बीमारी बनकर लोगों पर कहर ढा रही है। जैसे-जैसे तापमान आसमान छू रहा है, वैसे-वैसे अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है। राजधानी के सरकारी और निजी अस्पतालों में हालात ऐसे हैं कि ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक हर जगह भीड़ ही भीड़ नजर आ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, इन दिनों सबसे ज्यादा मरीज हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। खासकर बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग इस भीषण गर्मी की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है।
इमरजेंसी वार्ड में भी लगातार मरीजों का दबाव बना हुआ है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, हल्का और तरल भोजन करें और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें।
उधर, बढ़ती गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। अस्पतालों में जरूरी दवाइयों, बेड और स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। गौरतलब है कि इस समय की गर्मी सिर्फ असहजता नहीं, बल्कि जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि लोग सतर्क रहें और मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या में बदलाव करें। याद रखें—सावधानी ही सुरक्षा है, क्योंकि ये गर्मी अब ‘खतरनाक’ हो चुकी है!