सागर-निर्मला सप्रे का बड़ा राजनीतिक दांव! बोलीं बीना को जिला बना दो,300 करोड़ दे दो…मैं साथ आ जाऊंगी
सागर में बीना विधायक निर्मला सप्रे के एक बयान ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर भाजपा के करीब नजर आ रहीं सप्रे ने अब खुलकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में ‘डील’ और ‘सौदेबाजी’ की चर्चाओं को तेज कर दिया है। सागर में मीडिया से बातचीत के दौरान निर्मला सप्रे ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे बीना को जिला बनवा दें और विकास कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपए दिला दें, तो वह उनके साथ रहने को तैयार हैं।
जब उनसे पूछा गया कि आखिर वे इस समय किस पार्टी के साथ हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि मामला कोर्ट में है और वही तय करेगा कि उनका राजनीतिक स्टैंड क्या होगा। सप्रे ने कहा कि जनता फैसला कर चुकी है और फिलहाल वह सिर्फ जनता के विकास कार्यों पर ध्यान दे रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रभारी मंत्री का धन्यवाद देते हुए कहा कि बीना क्षेत्र में दो साल में 300 करोड़ रुपए के विकास कार्य हुए हैं। सप्रे ने यह भी कहा कि वह जहां से बुलावा आता है, वहां चली जाती हैं। उन्होंने कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि बीना की विधायक काम करे और यह महिलाओं को दबाने की राजनीति है।
निर्मला सप्रे के इस बयान पर कांग्रेस ने भी तीखा पलटवार किया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने कहा कि सप्रे का बयान साफ दिखाता है कि पूरा मामला राजनीतिक सौदेबाजी का है। उन्होंने कहा कि अगर विधायक खुद कह रही हैं कि उन्हें कांग्रेस ज्वाइन करनी पड़ेगी, तो इसका मतलब साफ है कि वे अब कांग्रेस में नहीं हैं। दरअसल, निर्मला सप्रे ने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के मंच पर भाजपा के गमछे में नजर आई थीं। इसके बाद उनकी सदस्यता समाप्त करने को लेकर मामला कोर्ट में पहुंचा, जो अभी विचाराधीन है। अब सप्रे के इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।