क्या हमारा जज होना गुनाह है ? ट्विशा केस में पहली बार बोलीं रिटायर्ड जज, किये कई खुलासे
क्या हमारा जज होना गुनाह है। बिना जांच पूरी हुए ही परिवार को दोषियों की तरह पेश किया जा रहा है। ये कहना है रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह का, दरअसल राजधानी भोपाल स्थित ट्विशा केस में पहली बार रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। इस दौरान वह भावुक हो गयी। उन्होंने कहा की बेटा और बहू ने एक दूसरे को पसंद किया था। हमारे और उनके परिवेश में बहुत अंतर था, पर हम खुश थे कि संस्कारवान लड़की है। मुझे उम्मीद थी कि शादी के बाद सब सामान्य हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उनका दावा है की जब शादी से पहले ट्विशा घर आई थी, तो वह बहुत समझदार लगी थी, लेकिन शादी के बाद पता चला कि वह एक्टिंग कर रही थी। हमें महसूस हुआ कि वो ऐसी नहीं थी।
बता दें की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध जान जाने के मामले में पहली बार रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह मीडिया के सामने आई। वह भावुक होते हुए रो पड़ीं। और कहा की ट्विशा की जान जाने से उनके परिवार के लिए भी गहरा सदमा है। वह मानसिक रूप से परेशान थीं। उनका साइकाइट्रिक ट्रीटमेंट और काउंसलिंग चल रही थी। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दावा किया कि शादी के 5 महीनों के दौरान ट्विशा कई बार दिल्ली गईं। हर बार लौटने पर उनका व्यवहार बदला हुआ दिखाई देता था। ग्लैमर वर्ल्ड का दबाव भी उनके जीवन पर असर डाल रहा था।
गर्भपात के मुद्दे पर गिरिबाला ने कहा कि यह फैसला ट्विशा ने अपनी इच्छा से लिया था। उन्होंने कहा की अगर लड़की झूल जाती है और लड़के नहीं झूल पाते हैं तो क्या वो आरोपी हो जाते हैं। लड़की के पिता की पर्नैलिटी ठीक नहीं है, वो भी बहुत अजीब हैं। मैंने उनकी मां को बुलाया कि यहां रहिए, कम से कम उसके शरीर को शांति से जाने दीजिए। आगे बोली की मेरे पति देश के लिए शहीद हुए हैं। शहीद की पत्नी को सम्मान नहीं दे सकते, ये कैसे लोग हैं। फूट फूट कर रोते हुए बोलीं सामान्य आदमी की बेल हो जाती है, हमारा जज होना क्या गुनाह है।------