Sagar- जब सपना सिर्फ सपना नहीं, जुनून बन जाए… तब मिलती है आईआईटी मुंबई, 19 साल के लड़के ने चौंकाया
अगर इरादे मजबूत हों, तो मंजिल भी रास्ता बदलकर आपके पास चली आती है।" यह बात 19 वर्षीय ओवैस मंसूरी की कहानी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। उमरिया के इस होनहार बेटे ने साबित कर दिया कि सपने देखने वाले बहुत होते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित करने वाले ही इतिहास रचते हैं।
ओवैस ने आठवीं कक्षा में ही तय कर लिया था कि उन्हें इंजीनियर बनना है और वह भी देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी मुंबई से पढ़ाई करनी है। इस सपने को पूरा करने के लिए वह दसवीं से ही कोटा चले गए और दिन-रात मेहनत में जुट गए।
पिछले साल जेईई मेन्स में उन्हें ओबीसी वर्ग में 3800वीं रैंक मिली। इस रैंक पर देश के कई नामी संस्थानों में आसानी से दाखिला मिल सकता था, लेकिन उनके सपनों की मंजिल सिर्फ आईआईटी मुंबई थी। उन्होंने समझौता नहीं किया। एक साल का ड्रॉप लिया, इंदौर जाकर सेल्फ स्टडी शुरू की और खुद से एक वादा किया—"इस बार मंजिल लेकर ही लौटूंगा।"
रोज सुबह 5 बजे उठना, 8 से 10 घंटे पढ़ाई करना, सोशल मीडिया से दूरी बनाना और हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने की कोशिश… यही उनकी सफलता का मंत्र बना। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और दूसरे प्रयास में उन्होंने जेईई मेन्स में 1856वीं रैंक हासिल कर आईआईटी मुंबई में अपना स्थान पक्का कर लिया।
इस सफलता के पीछे सिर्फ ओवैस की मेहनत नहीं, बल्कि परिवार का त्याग और विश्वास भी शामिल है। जब वह कोटा में पढ़ाई कर रहे थे, तब उनकी मां हमेशा उनके साथ रहीं और पिता नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद हर सप्ताह परिवार से मिलने पहुंचते थे।
आज ओवैस की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो किसी असफलता के बाद अपने सपनों से समझौता करने की सोच रहा है। क्योंकि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो एक हार के बाद फिर से उठकर पूरे जुनून के साथ आगे बढ़ते हैं।
ओवैस मंसूरी उमरिया जिले के रहने वाले हैं. इनके पिता मो. सलीम मंसूरी नगरीय प्रशासन विभाग में सिविल इंजीनियर हिअ इनके दादा मो. अमीन प्रिंसिपल रहे एक मामा सीए है तो एक मामा भारतीय सर्वेक्षण विभाग में उच्च अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, सागर के दयानंद वार्ड निवासी अब्दुल रशीद दलेल खा के यहां उनका ननिहाल है. इनकी नानी अनीसा बानो पूर्व पार्षद रही है, ओवैस अपने पिता मोहम्मद सलीम, मां शाहीन बेगम और बहन के साथ ननिहाल सागर पहुंचे थे, जहां अपने नाना, नानी, मामा और बहनों के साथ इस उपलब्धि का सेलिब्रेशन मनाया.