बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए फैक्टर-ए इंजेक्शन की गुहार,अस्पताल के बाहर बेबस पिता का धरना !
एमपी के सीहोर जिला अस्पताल के बाहर आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। एक बेबस पिता अपने मासूम बच्चों को गोद में लेकर अस्पताल के सामने धरने पर बैठ गया। उसके चेहरे पर दर्द था, आंखों में आंसू थे और जुबान पर सिर्फ एक गुहार मेरे बच्चों को बचा लीजिए। यह मामला सीहोर जिला अस्पताल का है, जहां श्रवण कुमार मेवाड़ा नाम के पिता अपने बच्चों के इलाज की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। उनके बच्चे एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और उन्हें जीवित रखने के लिए नियमित रूप से फैक्टर-ए नाम के विशेष इंजेक्शन की जरूरत है।
जानकारी के मुताबिक इस इंजेक्शन की कीमत करीब 22 हजार रुपये है और इसे हर 21 दिन में लगाना जरूरी होता है। गरीब परिवार से आने वाले श्रवण कुमार का कहना है कि इतनी बड़ी रकम हर तीन सप्ताह में जुटाना उनके लिए नामुमकिन है। रोते हुए उन्होंने कहा कि वे कई दिनों से अस्पताल और संबंधित अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली। उनका कहना है कि अगर समय पर इंजेक्शन नहीं मिला तो बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस इंजेक्शन के अस्पताल में उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, अगर वह सरकारी योजनाओं के तहत जरूरतमंद मरीजों को दिया जाना है, तो फिर यह परिवार अस्पताल के बाहर धरना देने को क्यों मजबूर हुआ? यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि व्यवस्था पर उठता बड़ा सवाल भी है। आखिर इलाज के अधिकार के बावजूद एक पिता को अपने बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए सड़क पर क्यों बैठना पड़ा? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है, क्योंकि यहां मामला सिर्फ इलाज का नहीं, बल्कि मासूम जिंदगियों का है।