गूंगे-बहरे आदिवासी और बुजुर्ग किसान के खेतों को बनाया खदान, खनिज माफिया का तांडव!
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि खनिज माफिया का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब सिर्फ सरकारी जमीन ही नहीं, बल्कि गरीब किसानों की निजी जमीनें भी उनकी गिरफ्त में आती जा रही हैं। मामला शाहनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम कचौरी का है, जहां एक बुजुर्ग किसान और एक मूक-बधिर आदिवासी किसान की जमीन पर जबरन मुरूम उत्खनन किए जाने के आरोप लगे हैं। पीड़ितों का दावा है कि भारी मशीनों से खेतों की खुदाई कर उनकी उपजाऊ जमीन को गहरे गड्ढों में बदल दिया गया है। 60 वर्षीय किसान विश्राम बसोर का आरोप है कि उनकी निजी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया और पोकलेन मशीनों से लगातार खुदाई की जा रही है। उनका कहना है कि विरोध करने पर धमकियां भी दी गईं।
सबसे दर्दनाक तस्वीर उस मूक-बधिर आदिवासी किसान की बताई जा रही है, जो अपनी पीड़ा शब्दों में बयां नहीं कर सका, लेकिन अपने खेत में बने गहरे गड्ढे दिखाकर अपना दर्द जाहिर करता नजर आया। आरोप यह भी है कि माफिया ने गांव के श्मशान घाट को भी नहीं छोड़ा और वहां भी खुदाई कर दी। मामले में यह भी कहा जा रहा है कि प्रशासन और खनिज विभाग को पहले शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची तो कथित तौर पर वहां मौजूद जेसीबी मशीनें और डंपर तेजी से निकलते दिखाई दिए। हालांकि खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायत की जानकारी मिली है और मामले में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल अवैध उत्खनन का मामला नहीं, बल्कि गरीब किसानों के अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल भी बन सकता है।