सागर के नौजवान ने किया कमाल, 6 असफलताओं के बाद पाई सफलता,प्रदेश में पहली रैंक बने खाद्य अधिकारी
तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ,अग्निपथ,अग्निपथ.... महान कवि हरिवंशराय बच्चन की लिखी प्रसिद्ध कविता की ये चंद लाइनें हैं। कहते हैं की ज़िंदगी में भी हार नहीं माननी चाहिए अगर इरादे सच्चे और पक्के हो तो सफलता ज़रूर मिलती है। कुछ इसी तरह का काम सागर के एक युवा ने भी किया है। लगातार 6 असफलताओं के बाद विजय अहिरवार को सफलता मिली है। SC कैटेगरी में प्रदेश में पहली रैंक हासिल की है। जो अब खाद्य सुरक्षा अधिकारी बन गए हैं।
सागर के रहने वाले 27 साल के विजय अहिरवार आखिरकार मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा आयोजित परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर चयनित हुए। विजय की यह सफलता बताती है की सच्ची लगन, मेहनत आत्मविश्वास से सब कुछ किया जा सकता है। सागर के विजय अहिरवार एक साधारण परिवार से आते हैं। परिवार में कुल 7 भाई-बहन हैं। जिनमें विजय समेत 5 सदस्य सरकारी नौकरियों में हैं। विजय के पिता शिक्षक हैं। जिन्होंने हमेशा बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। उनकी मां जरूर पांचवीं कक्षा तक पढ़ी हैं लेकिन अपने बच्चों को आगे बढ़ाने में हर संभव सहयोग दिया।
बता दें की विजय की शुरुआती पढ़ाई जवाहर नवोदय स्कूल से हुई। 10वीं कक्षा में उम्मीद से कम अंक आने से उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। जो उनके लिए बड़ा झटका था। लेकिन हार नहीं मानी इसके बाद निजी स्कूल से पढ़ाई पूरी की और बस अटूट मेहनत करते रहे। विजय का एक ही लक्ष्य था MPPSC में चयन, बस पूरा फोकस सिर्फ इसी पर किया। लेकिन इम्तिहान का दौरा था। 6 बार MPPSC की परीक्षा दी दो बार इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन चयन नहीं हो सका। असफलता मिलती रही लेकिन हार न मानने की विजय ने कसम खा ली थी। हर रोज 12 घंटे पढ़ाई की परिवार ने भी सहयोग किया और उसने आखिरकार अपने लक्ष्य को पा लिया।
इस सफलता का श्रेय वह अपने परिवार को देते हैं। जिन्होंने हर मुश्किल में उनका साथ दिया। अब लगातार उन्हें बधाइयां मिल रही हैं।
विजय की ये मेहनत और सफलता बताती है की ज़िंदगी में कभी असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए। न ही हार माननी चाहिए।