Sagar-108 कलशों से हुआ महाअभिषेक, अस्वस्थ हुए भगवान जगन्नाथ ! अब 15 दिन रहेंगे अनसर गृह में
सागर जिले के गढ़ाकोटा में आस्था और सनातन परंपरा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां प्राचीन श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर में स्नान पूर्णिमा महोत्सव पूरे धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और "जय जगन्नाथ" के जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से महाअभिषेक किया गया। लेकिन इस महाअभिषेक के बाद अब भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो गए हैं और अगले 15 दिनों तक विश्राम करेंगे।
गढ़ाकोटा स्थित प्राचीन श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर में सोमवार को स्नान पूर्णिमा पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया गया। भगवान श्री जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का पंचामृत, गंगाजल, चंदन, पुष्प और औषधीय द्रव्यों से अभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
महामंडलेश्वर एवं जगदीश मंदिर शाला के महंत श्री हरिदास जी ने बताया कि सनातन परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ को ज्वर यानी बुखार हो जाता है। इसी वजह से भगवान को अगले 15 दिनों के लिए अनसर गृह यानी विश्राम कक्ष में विराजमान किया जाता है।
इस दौरान भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन बंद रहेंगे और केवल सेवायत पुजारी ही उनकी सेवा करेंगे। परंपरा के अनुसार वैद्य भगवान की नाड़ी भी देखते हैं और आयुर्वेदिक उपचार की प्रक्रिया शुरू होती है। भगवान को जड़ी-बूटियों से तैयार औषधीय काढ़ा और हल्का सात्विक भोग अर्पित किया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि 15 दिन बाद भगवान पूर्ण स्वस्थ होकर नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।
यह परंपरा केवल पूजा नहीं, बल्कि भगवान को मानव स्वरूप मानकर सेवा, श्रद्धा और समर्पण का जीवंत संदेश भी देती है।