केन नदी पर रेत माफियाओं का हमला ! मशीनों से छलनी हो रही नदी, सवालों में प्रशासन
बुंदेलखंड की जीवनदायिनी कही जाने वाली केन नदी इस वक्त गंभीर खतरे के बीच नजर आ रही है। पन्ना जिले से सामने आई तस्वीरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि नदी के बीचों-बीच भारी मशीनों और लिफ्टरों के जरिए बड़े स्तर पर रेत खनन किया जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी गतिविधियां चलने के बावजूद जिम्मेदार विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ी ?
मामला पन्ना जिले के अजयगढ़ ब्लॉक के बीरा क्षेत्र का बताया जा रहा है, जो पन्ना और छतरपुर जिले की सीमा से जुड़ा इलाका है। सामने आए दृश्य में नदी के बीचों-बीच भारी मशीनें काम करती दिखाई दे रही हैं। आरोप है कि रेत निकालने के लिए अस्थायी रास्ते और पुल भी बनाए गए हैं, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर यह चिंता जताई जा रही है कि यदि नदी के भीतर इसी तरह बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप जारी रहा तो पर्यावरण और जलीय जीवन पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अनियंत्रित खनन से भूजल स्तर और आसपास के इलाकों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
जब इस मामले में पन्ना खनिज प्रशासन से सवाल किए गए तो उप संचालक रवि पटेल ने बताया कि वर्तमान में जिले का ठेका मेसर्स यूरेका माइंस एंड मिनरल्स फर्म के पास है और कई खदानें वैध रूप से संचालित हैं। उन्होंने कहा कि यदि पनडुब्बियों या अस्थायी पुलों को लेकर शिकायतें मिलती हैं तो विभाग कार्रवाई करता है और आगे भी करेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो कार्रवाई कब होगी? और यदि सब कुछ नियमों के तहत है, तो नदी के बीच चल रही इन गतिविधियों पर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा?
फिलहाल पूरे मामले पर अब प्रशासनिक कार्रवाई और जांच की निगाहें टिकी हुई हैं।