Sagar- बच्चों के सुरक्षित भविष्य की ओर कदम, बंडा में जोश के साथ चला पल्स पोलियो अभियान
देश में पोलियो वायरस का आखिरी केस 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में हावड़ा जिले की 2 साल की बच्ची में मिला था। इसी साल देश कोपोलियो मुक्त घोषित किया गया था। इसके बाद पड़ोसी देशों में वायरस व मरीज मिल रहे हैं। इस कारण पोलियो दवा पिलाने का क्रम सालाना चल रहा है।
इस साल भी 28 से 30 जून तक 5 साल के बच्चों को बूथ पर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। 29 व 30 जून को छूटे हुए बच्चों को घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। जिले में कुल 370000 बच्चों को दवा पिलाई जाएगी। पोलियो खुराक दिए जाने का कारण पाकिस्तान, अफगानिस्तान हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 2025-26 में पाकिस्तान में पोलियो के 31 व अफगानिस्तान में 9 केस मिले हैं। इन देशों से भारत के लोगों के संबंध भी हैं।
इसी क्रम में सागर जिले के बंडा में पोलियो की दवा पिलाई गई पोलियों का नामोनिशान मिटेगा, इसी संकल्प के साथ रविवार को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के तहत बंडा में स्वास्थ्य विभाग और मध्य प्रदेश के एकमात्र एमपीडब्लू प्रशिक्षण केंद्र के ट्रेनी के द्वारा पूरे जोश के साथ मैदान में उतरे। बस स्टैंड से लेकर मोहल्लों और आसपास के गांवों तक टीमों ने घर-घर पहुंचकर 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई। कोई भी बच्चा छूटे नहीं, इसके लिए टीमों ने हर संभव प्रयास किया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला सागर, डॉ. जी. पी. आर्या ने एमपीडब्लू प्रशिक्षणार्थियों के उत्साह, सेवा भावना और जनस्वास्थ्य के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियान ही समाज को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से स्थायी रूप से मुक्त बनाने की दिशा में मजबूत कदम हैं।
नारा: “एक भी बच्चा नहीं छूटेगा, तभी पोलियो हमेशा के लिए टूटेगा!” “दो बूंद जिंदगी की, हर बच्चे की सुरक्षा की।”