Sagar- 39 साल सेवा, हजारों जिंदगी बचाईं ! डॉ. नीना गिडियन ने रचा स्वास्थ्य बदलाव का इतिहास
सिर्फ पद संभालना और जिम्मेदारियां निभाना अलग बात है, लेकिन किसी व्यवस्था को बदल देना और हजारों लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाना अलग पहचान बनाता है। सागर संभाग की क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन ने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसा ही एक उदाहरण पेश किया है। 30 जून को उन्होंने अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया, लेकिन पीछे छोड़ गईं एक ऐसी विरासत, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।
जब डॉ. नीना गिडियन ने क्षेत्रीय संचालक का कार्यभार संभाला था, तब सागर संभाग के छह जिले—सागर, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह और निवाड़ी—मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों में बेहद पीछे थे। यह आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले थे। लेकिन लगातार प्रयास, बेहतर रणनीति और जमीनी स्तर पर काम करने की सोच ने तस्वीर बदल दी। हाल ही में मुख्यमंत्री, कलेक्टर और कमिश्नरों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सामने आया कि सागर संभाग का कोई भी जिला अब नीचे की सूची में नहीं है, बल्कि कुछ जिले प्रदेश के टॉप-5 में भी अपनी जगह बना चुके हैं।
इतनी बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बावजूद डॉ. नीना गिडियन ने अपने मूल पेशे को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में कभी नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस नहीं लिया। उनका मानना था—"मैं सबसे पहले एक डॉक्टर हूं।" इसी सोच के साथ वे रोजाना करीब दो घंटे मरीजों को देना पसंद करती थीं। चाहे एचआईवी-एड्स की ट्रेनिंग हो, टीबी मरीजों की पहचान और इलाज, या फिर गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना—उन्होंने हर स्तर पर काम किया।
खास बात यह रही कि रक्तदान अभियान के जरिए एकत्रित ब्लड को सिर्फ सागर ही नहीं, बल्कि संभाग के अन्य जिलों तक भी पहुंचाया गया, जिससे मातृ मृत्यु दर कम करने में मदद मिली। अपने 39 साल के सरकारी सेवा काल में उन्होंने मेडिकल अधिकारियों और नर्सिंग स्टाफ को स्किल ट्रेनिंग दी, रिसर्च कार्य किए और स्वास्थ्य क्षेत्र में कई नवाचार भी किए। उनके द्वारा विकसित ईजी गिडियन सूचर को मातृ जीवन रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
उनकी उपलब्धियां भी किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। महिला सशक्तिकरण अवॉर्ड, वंडर फॉगसियन अवॉर्ड सहित कई राष्ट्रीय सम्मान उनके नाम दर्ज हैं। इसके अलावा उन्होंने कई मेडिकल संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर रहकर भी सेवाएं दीं। डॉ. नीना गिडियन की कहानी सिर्फ एक डॉक्टर या प्रशासक की नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की मिसाल है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो आंकड़े भी बदलते हैं और लोगों की जिंदगी भी।