मध्यप्रदेश में दहेज का दंश, 5 साल में 2,876 प्रताड़ना के मामले, 128 महिलाओं की गई जान
दहेज प्रथा का कड़वा सच एक बार फिर सामने आया है। आधुनिकता और बदलते समाज के दौर में भी दहेज की मांग महिलाओं की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। बीते पांच वर्षों के आंकड़े ऐसे हैं जो चिंता बढ़ाने वाले हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच जिले में दहेज प्रताड़ना के 2,876 मामले दर्ज किए गए, जबकि दहेज हत्या और जीवन लीला समाप्त करने जैसे से जुड़े 128 मामलों में महिलाओं की मौत हुई। इन आंकड़ों को देखें तो औसतन हर महीने करीब 50 महिलाएं दहेज प्रताड़ना का शिकार हुईं, जबकि 2 से 3 महिलाओं की जान चली गई। हाल के कुछ मामलों ने एक बार फिर इस गंभीर सामाजिक समस्या को चर्चा में ला दिया है।
एमपी के ग्वालियर जिले के मुरार छावनी के सुरैयापुरा की 21 वर्षीय पलक रजक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में परिवार ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि बुलेट बाइक और कार की मांग को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
वहीं तिघरा गांव की मुस्कान कुशवाह के मामले में भी परिजनों ने आरोप लगाया कि कम दहेज को लेकर ताने दिए जाते थे और कार की मांग की जा रही थी। इसी तरह गर्भवती निशा राठौर की मौत और प्रीति के मामले में भी परिजनों ने दहेज व प्रताड़ना से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। इन मामलों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
महिला अपराध शाखा की डीएसपी शिखा सोनी का कहना है कि काउंसिलिंग और सख्त कार्रवाई के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन चुनौती अब भी बनी हुई है। दहेज प्रताड़ना अक्सर तानों से शुरू होती है और धीरे-धीरे मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर शिकायत और सामाजिक समर्थन ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह आंकड़े केवल रिकॉर्ड नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़े एक गंभीर सवाल की ओर इशारा करते हैं।