Sagar - 700 साल पुराने कल्पवृक्ष को बचाने के प्रयास शुरू, वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा संरक्षण
सागर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 700 वर्ष पुराने कल्पवृक्ष के संरक्षण के लिए शुक्रवार को जिला प्रशासन ने विशेषज्ञों की निगरानी में विशेष अभियान चलाया। पिछले एक सप्ताह से वृक्ष एक ओर झुकने लगा था, जिससे उसके गिरने की आशंका जताई जा रही थी।
हिंदू संगठनों द्वारा लगातार मांग उठाए जाने के बाद नगर निगम, वन विभाग, उद्यानिकी विभाग और वनस्पति विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने वृक्ष का निरीक्षण किया। इसके बाद भारी शाखाओं की वैज्ञानिक तरीके से छंटाई कर वजन कम करने का कार्य शुरू किया गया। ताकि वृक्ष का संतुलन बनाए रखा जा सके।
छंटाई के दौरान अपर कलेक्टर अविनाश रावत, नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री, वन एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी, वनस्पति विशेषज्ञ तथा विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे। विशेषज्ञों का मानना है कि शाखाओं का भार कम होने से पेड़ पर पड़ने वाला दबाव कम होगा।
झुकाव धीरे-धीरे कम होने की संभावना है।
पुरोहित-पुजारी विद्वत संघ के अध्यक्ष पंडित शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि धर्मग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में कल्पवृक्ष भी शामिल है। इसे मनोकामना पूर्ण करने वाला दिव्य वृक्ष माना गया है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष है। डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. अजय शंकर मिश्रा ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से की गई छंटाई के बाद वृक्ष का संतुलन सुधरेगा। नई शाखाओं का विकास होगा और झुकाव भी धीरे-धीरे कम हो सकता है।
अपर कलेक्टर अविनाश रावत ने बताया कलेक्ट्रेट परिसर में लगा करीब 700 वर्ष पुराना कल्पवृक्ष पिछले एक सप्ताह से एक ओर झुकने लगा था, जिससे उसके गिरने की आशंका बढ़ गई थी। इस पर वन विभाग, उद्यानिकी विभाग और वनस्पति विशेषज्ञों की टीम ने निरीक्षण कर भारी शाखाओं की छंटाई की सलाह दी। ताकि वजन कम होकर वृक्ष सुरक्षित रह सके। विशेषज्ञों के सुझाव अनुसार वृक्ष का वानस्पतिक उपचार भी कराया जा रहा है।