सागर- बरसात में बढ़ रहे आंखों के संक्रमण पर IMA का जनजागरण अभियान, फंगल स्क्लेराइटिस से अंधत्व का खतरा
सागर- बरसात में बढ़ रहे आंखों के संक्रमण पर IMA का जनजागरण अभियान, फंगल स्क्लेराइटिस से अंधत्व का खतरा
सागर। बरसात के मौसम के साथ आंखों के संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी को देखते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) सागर शाखा और सागर ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में इंद्रा नेत्र अस्पताल में विशेष जनजागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कंजंक्टिवाइटिस और फंगल स्क्लेराइटिस जैसे गंभीर नेत्र रोगों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।
शिविर में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया तथा नेत्र रोगों की रोकथाम, शुरुआती लक्षणों और समय पर उपचार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
विशेषज्ञों ने बताया कि बरसात के दौरान कंजंक्टिवाइटिस यानी आंख आने के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। कई बार लोग आंखों में लालिमा, पानी आना, दर्द या धुंधलापन जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना आवश्यक है।
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण खरे ने बताया कि फंगल स्क्लेराइटिस आंख के सफेद हिस्से (स्क्लेरा) का अत्यंत गंभीर और दुर्लभ संक्रमण है। यह संक्रमण अक्सर पौधों की टहनियों, पत्तियों या मिट्टी से आंख में चोट लगने के बाद विकसित हो सकता है। उन्होंने बताया कि Fusarium और Aspergillus जैसे फंगस इसके प्रमुख कारण होते हैं। मधुमेह से पीड़ित मरीजों, पहले आंखों की सर्जरी करा चुके लोगों और लंबे समय तक स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स का उपयोग करने वालों में इसका खतरा अधिक होता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप चावला ने बताया कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में आंख में तेज दर्द, लगातार लालिमा, धुंधला दिखाई देना, रोशनी से परेशानी, अत्यधिक पानी आना और आंख के सफेद हिस्से पर पीले रंग की गांठ या पस बनना शामिल है।
वहीं डॉ. अदिति दूबे ने बताया कि फंगल स्क्लेराइटिस का उपचार काफी लंबा और जटिल हो सकता है। गंभीर स्थिति में शल्य चिकित्सा की आवश्यकता भी पड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इलाज में देरी होने पर संक्रमण आंख के अंदर तक फैल सकता है और स्थायी अंधापन तक हो सकता है।
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने नागरिकों से अपील की कि आंखों में चोट लगने पर घरेलू उपचार करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लें और बिना चिकित्सकीय परामर्श के स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें। साथ ही खेती, बागवानी और अन्य जोखिम वाले कार्यों के दौरान सुरक्षात्मक चश्मा पहनने की सलाह भी दी गई।