सागर का मिनी मैहर बनेगा हाईटेक ! 250 साल पुराने मंदिर तक अब 2 मिनट में पहुंचेंगे श्रद्धालु
सागर जिले का प्रसिद्ध टिकीटोरिया क्षेत्र, जिसे लोग "मिनी मैहर" के नाम से भी जानते हैं, अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। हरे-भरे पहाड़ों के बीच स्थित मां विंध्यवासिनी का भव्य मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। पहाड़ी के ऊपरी हिस्से पर बने इस संगमरमर मंदिर तक पहुंचने के लिए अभी श्रद्धालुओं को 300 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए काफी चुनौती भरा काम होता है।
इसी परेशानी को दूर करने के लिए अब यहां करीब 17 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से आधुनिक रोपवे बनाया जा रहा है। इस परियोजना का काम इसी साल की शुरुआत में शुरू हुआ था और अब तक लगभग 30 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2027 के मध्य तक यह रोपवे शुरू हो जाएगा।
खास बात यह है कि यह बुंदेलखंड का पहला रोपवे होगा, जिसमें अंतरराष्ट्रीय फेनिकुलर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक में दो ट्रॉलियां चलती हैं, एक ऊपर जाती है और दूसरी नीचे आती है। यह ट्रॉलियां हवा में लटकती नहीं हैं, बल्कि ट्रेन की तरह ट्रैक पर चलती हैं। इससे बिजली की खपत कम होती है और सुरक्षा भी अधिक रहती है।
करीब 250 मीटर लंबे इस रोपवे के शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं को 15 से 30 मिनट तक सीढ़ियां चढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मंदिर तक पहुंचने का समय घटकर सिर्फ 2 से 3 मिनट रह जाएगा।
इतिहास की बात करें तो यह सिद्ध क्षेत्र करीब ढाई सौ साल पहले मराठा शासनकाल की रानी लक्ष्मीबाई खेर द्वारा बनवाया गया था। बीते तीन से चार दशकों में मंदिर समिति ने यहां लगातार विकास कार्य किए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। अब रोपवे बनने के बाद यह धार्मिक स्थल आस्था के साथ-साथ पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है।