देखिये डबल इंजन के विकास की तस्वीर, एम्बुलेंस नहीं मिली तो खाट पर ले गए और महिला की निकली जान !
ये तस्वीर देखिये जिसने फिर एक बार शर्मसार कर दिया। आप भी कहेंगे की, क्या यही है सरकार का विकास, आखिर कब तक लोगों को यूं ही अपनी जान गंवानी पड़ेगी। एमपी के रीवा जिले के मनगंवा क्षेत्र के नदना (डिहिया) गांव में एम्बुलेंस न मिलने से एक आदिवासी महिला रामकली रावत ने दम तोड़ दिया। वह आकाशीय बिजली गिरने से गंभीर घायल हुई थी। सड़क न होने से एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकी। महिला की जान बचाने लोगों ने खाट का सहारा लिया। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
सवाल ये है की क्या यही डबल इंजन की सरकार का विकास है। गांवों में आज भी पक्की सड़कें नहीं है। सड़कें न होने, एम्बुलेंस न पहुंचने और इलाज के अभाव में लोगों की जान चली जाती है। तस्वीरें देखकर आपको भी गुस्सा आएगा। इलाज के अभाव में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए सरकार को घेरा है।
बता दें की ये पूरा मामला रीवा जिले के मनगंवा विधानसभा के नदना (डिहिया) गांव का है। जहां आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला इसकी चपेट में आ जाने से झुलस गयी। गंभीर हालत के चलते उसे अस्पताल ले जाना था। लेकिन समस्या ये थी की पक्की सड़क ही नहीं थी। आखिर एम्बुलेंस कैसे आ सकती थी। लिहाजा लोग महिला को खाट पर लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए। तक़रीबन दो किलोमीटर तक उसे खाट के सहारे लेकर गए। लेकिन महिला की जान नहीं बचाई जा सकी।
तस्वीरों में आपको नज़र आएगा की सड़क न होने से कुछ लोग महिला को खाट पर रखकर ले जा रहे हैं। उसे खेतों के रास्ते से ले जाया जा रहा है। क्योंकि लोगों के पास कोई और रास्ता नहीं था।
इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने भी सवाल खड़े किये हैं सोशल मीडिया X पर वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा की महिला को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस नहीं, खाट का सहारा लेना पड़ा, यही है भाजपा सरकार के डबल इंजन विकास की असल तस्वीर। जब गांव तक सड़क नहीं है और समय पर इलाज नहीं, तो आखिर मौत का जिम्मेदार कौन ?