बस स्टैंड पर चला बुलडोजर, जर्जर यात्री प्रतीक्षालय गिरते ही छिड़ा सियासी संग्राम | SAGAR TV NEWS |
बस स्टैंड पर मंगलवार सुबह जर्जर यात्री प्रतीक्षालय को गिराने की कार्रवाई ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। नगर पालिका के अमले ने जेसीबी मशीन से करीब 30 साल पुराने प्रतीक्षालय को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन इसे यात्रियों की सुरक्षा और बस स्टैंड के सौंदर्यीकरण के लिए जरूरी कदम बता रहा है, जबकि नगर पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार सुबह एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के हटा बस स्टैंड पर नगर पालिका और प्रशासन की संयुक्त टीम ने पहले बस स्टैंड परिसर में फैले अतिक्रमण को हटाया। इसके बाद वर्षों पुराने जर्जर यात्री प्रतीक्षालय को जेसीबी की मदद से गिरा दिया गया।
कार्रवाई के दौरान तहसीलदार आलोक जैन, प्रभारी सीएमओ राजेंद्र खरे, पुलिस और नगर पालिका का अमला मौके पर मौजूद रहा। इसी बीच नगर पालिका अध्यक्ष शैलेन्द्र खटीक, उपाध्यक्ष प्रशांत पाठक और कांग्रेस पार्षद भी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच काफी देर तक तीखी बहस होती रही। नगर पालिका अध्यक्ष शैलेन्द्र खटीक ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई भाजपा विधायक के इशारे पर की गई। उनका कहना है कि नगर पालिका परिषद को न तो सूचना दी गई और न ही परिषद से कोई प्रस्ताव पारित कराया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि बारिश के मौसम में यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक प्रतीक्षालय बनाए बिना पुराने भवन को क्यों गिराया गया।
वहीं उपाध्यक्ष प्रशांत पाठक ने भी प्रशासन पर परिषद के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि नियमों का पालन किए बिना कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर प्रभारी सीएमओ राजेंद्र खरे ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रतीक्षालय पूरी तरह जर्जर हो चुका था और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने बताया कि बस स्टैंड के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण योजना के तहत यह कार्रवाई सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई है। फिलहाल हटा बस स्टैंड पर जर्जर भवन तो गिर गया, लेकिन उसके साथ ही सियासी बहस भी तेज हो गई है। एक पक्ष इसे यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है, तो दूसरा पक्ष वैकल्पिक व्यवस्था और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन यात्रियों की सुविधा के लिए कितनी जल्दी नई व्यवस्था उपलब्ध कराता है।