सागर-रेत की जगह डस्ट से हो रही चिनाई? नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल,आंगनबाड़ी भवन निर्माण में!
सागर नगर निगम के वार्ड क्रमांक-1 हरिसिंह गौर वार्ड में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भवन निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी कर रेत की जगह डस्ट का उपयोग किया जा रहा है। मामले की जानकारी मिलते ही नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष बब्बू यादव मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। सागर के हरिसिंह गौर वार्ड में बन रहे आंगनबाड़ी भवन के निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि भवन की दीवारों की चिनाई में रेत के बजाय डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और गुणवत्ता पर गंभीर आशंकाएं पैदा हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार इस निर्माण कार्य का ठेका राहुल ठाकुर को मिला है, जबकि काम पेटी ठेकेदार शिवा राठौर द्वारा कराया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष बब्बू यादव ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। बब्बू यादव ने आरोप लगाया कि भवन निर्माण में तय मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह भवन छोटे-छोटे बच्चों के लिए बनाया जा रहा है, इसलिए इसकी गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। यदि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया तो भविष्य में यह बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि नगर निगम के कई निर्माण कार्यों में लगातार अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि निगम आयुक्त को पहले भी प्रमाणों के साथ शिकायतें दी गई थीं, लेकिन जिम्मेदार ठेकेदारों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शहर में चल रहे कई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है और संबंधित एजेंसियों पर निगरानी नहीं रखी जा रही। बब्बू यादव ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच करवाने तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इस मामले को लेकर नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि जांच के बाद निर्माण कार्य में अनियमितताओं के आरोप सही साबित होते हैं या नहीं और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।