सागर- देवरी के सांदीपनि स्कूल में एडमिशन संकट! सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में, आंदोलन की चेतावनी
सागर जिले के देवरी स्थित करोड़ों रुपये की लागत से बने शासकीय सांदीपनि उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रवेश को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। 10वीं और 11वीं कक्षा में सैकड़ों छात्र-छात्राओं को अब तक प्रवेश नहीं मिल पाया है। अभिभावक लगातार प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलने से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। अब इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी आंदोलन की चेतावनी दे दी है। करीब 33 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए शासकीय सांदीपनि उच्च माध्यमिक विद्यालय से क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों को बेहतर शिक्षा की उम्मीद थी। लेकिन नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रवेश से वंचित हैं। जानकारी के अनुसार, अभी तक लगभग 200 से 500 विद्यार्थियों को 10वीं और 11वीं कक्षा में प्रवेश नहीं मिल सका है।
कुछ दिन पहले छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों ने देवरी एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जल्द प्रवेश दिलाने की मांग की थी। उनका कहना है कि दो महीने से वे अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। लगातार हो रही देरी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनका पूरा शैक्षणिक सत्र खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव पांडे ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि सभी पात्र विद्यार्थियों को जल्द प्रवेश नहीं दिया गया तो कांग्रेस बड़ा जनआंदोलन करेगी। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर प्रशासन की उदासीनता स्वीकार नहीं की जा सकती।
वहीं, इस पूरे मामले में विद्यालय प्रबंधन की ओर से भी कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। विद्यालय के प्राचार्य ने मीडिया से चर्चा करने से इनकार कर दिया। शिक्षा विभाग की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। गौरतलब है कि 14 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले के केसली से इस शासकीय सांदीपनि विद्यालय का शुभारंभ करते हुए बेहतर शिक्षा व्यवस्था का संदेश दिया था। ऐसे में अब करोड़ों की लागत से बने इस विद्यालय में प्रवेश को लेकर खड़े हुए सवाल प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर छात्रों का यह प्रवेश संकट कब दूर होगा।