इस जिले को मिला 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप नक्शा, 1120 प्राचीन पांडुलिपियों ने बढ़ाई देशभर में पहचान
मध्य प्रदेश का सागर संभाग के टीकमगढ़ जिला इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम अभियान के तहत यहां ऐसी दुर्लभ और सैकड़ों वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं, जो भारतीय ज्ञान परंपरा, इतिहास, संस्कृति और अध्यात्म की अनमोल धरोहर मानी जा रही हैं। खास बात यह है कि टीकमगढ़ में अब तक 1120 प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान हो चुकी है, जिनमें एक 10 फीट लंबी हस्तलिखित जम्बूद्वीप पांडुलिपि सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
ज्ञान भारतम अभियान के तहत जिले की लाइब्रेरी, मंदिरों और निजी संग्रहों में संरक्षित दुर्लभ ग्रंथों की खोज और डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। टीकमगढ़ शहर के पुरानी टेहरी स्थित बड़े जैन मंदिर में मिली 10 फीट लंबी हस्तलिखित पांडुलिपि में जम्बूद्वीप का विस्तृत नक्शा, विभिन्न आकृतियां और जैन दर्शन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां अंकित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह पांडुलिपि 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच की हो सकती है।
इतिहासकारों का मानना है कि ये केवल धार्मिक दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि भारतीय गणित, ज्यामिति, दर्शन और ब्रह्मांड विज्ञान की समृद्ध परंपरा के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। इनका डिजिटलीकरण होने से देश-विदेश के शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पुरातत्वविदों को अध्ययन के लिए एक मजबूत आधार मिलेगा।टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने बताया कि सबसे पहले नगर भवन की लाइब्रेरी में दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ मिले थे। जांच और अध्ययन के दौरान पता चला कि ये सैकड़ों वर्ष पुराने हैं। इनमें शालिहोत्र नामक ग्रंथ भी शामिल है, जिसे विश्व का पहला अश्व विज्ञान ग्रंथ माना जाता है। इसमें घोड़ों की नस्ल, स्वभाव, रोग और उपचार का विस्तृत वर्णन चित्रों सहित किया गया है।
ज्ञान भारतम ऐप के माध्यम से मध्य प्रदेश ने देशभर में सबसे अधिक पांडुलिपियों का पंजीयन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में अब तक 34 लाख से अधिक पांडुलिपि पन्नों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि टीकमगढ़ में मिली ये दुर्लभ धरोहरें भारतीय ज्ञान-विज्ञान की अनछुई परंपराओं को नई पहचान देंगी और जिले को देश के प्रमुख पांडुलिपि एवं प्राचीन ज्ञान अध्ययन केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी।