केन-बेतवा लिंक पर, चिता आंदोलन, जल सत्याग्रह और आमरण अनशन से गूंजा MP और फिर! | SAGAR TV NEWS |
क्या विकास की कीमत लोगों का घर, जमीन और जीवन होगा...? क्या हजारों परिवारों की पीड़ा के बीच विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है...? एमपी के सागर संभाग के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में अब आंदोलन ने ऐसा रूप ले लिया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बराना नदी के किनारे पिछले आठ दिनों से चिता आंदोलन, जल सत्याग्रह और आमरण अनशन लगातार जारी है। आइए देखते हैं यह खास रिपोर्ट।
छतरपुर के कुपी गांव के पास बराना नदी का किनारा इन दिनों विरोध का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां चिताओं पर लेटी महिलाएं, नदी के पानी में खड़ी आदिवासी महिलाएं और सांकेतिक फांसी लगाकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण सरकार और प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य विकास कार्यों से प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें न तो उचित मुआवजा मिला और न ही सम्मानजनक पुनर्वास। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और किसान नेता अमित भटनागर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने परियोजना में 400 करोड़ रुपये से अधिक के कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने आंदोलन स्थल पर पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी बंद करा दी हैं। उनका कहना है कि महिलाएं और बच्चे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं और मेडिकल जांच जैसी जरूरी व्यवस्थाएं भी नहीं की जा रही हैं। प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि आंदोलन खत्म कराने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विस्थापित ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच, उचित मुआवजा और पुनर्वास की गारंटी नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब सवाल यह है कि क्या विकास और विस्थापन के बीच कोई संतुलित रास्ता निकलेगा? क्या आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी? या फिर यह संघर्ष आने वाले दिनों में और उग्र रूप लेगा? फिलहाल छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर सियासत और जनआंदोलन दोनों तेज होते नजर आ रहे हैं।