सागर- इस समाज ने लिया तेरहवीं भोज न कराने का निर्णय, मृ त्यु भोज बंद करने का लिया था निर्णय
कहते हैं की ज़माना बदल रहा है लोगों की सोच भी बदलती जा रही है। जिसके बाद इसके परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं कुछ इसी तरह सागर के खुरई में भी देखने को मिला। जहां एक शिक्षक ने अपनी माता के निधन के बाद तेरहवीं भोज न कराते हुए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कराया। देखा जाए तो बीते समय में कई अन्य समाजों के द्वारा भी इस तरह की पहल की शुरुआत की गयी है। जहां मृत्यु भोज को न कराने का फैसला लिया गया है।
इसी तरह खुरई में बंसल समाज की बैठक के बाद पहली बार तेरहवीं भोज की परंपरा में बदलाव देखने को मिला। शिक्षक ने अपनी माता की तेरहवीं पर मृत्युभोज के बजाय मंगलधाम में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। यह बदलाव समाज के जागरूकता अभियान का सकारात्मक परिणाम है।
सनातन धर्म में किसी भी व्यक्ति के निधन के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं संस्कार या मृत्यु भोज की प्रथा चली आ रही है। लोग इस प्रथा को भली भांति निभाते हैं। लेकिन अब काफी लोग इस प्रथा से विरत हो रहे हैं। इसकी वजह अब लोग दिवंगत आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ करते हैं। ऐसे ही पिछले दिनों बंसल समाज ने शिवाजी वार्ड में मंदिर में बैठकर तेरहवीं पर मृत्युभोज बंद करने का निर्णय लिया था। समाज ने पहली बार समाज की शांति बाई सजेले के निधन के बाद तेरहवीं कार्यक्रम में मृत्युभोज न करते हुए उनके शिक्षक बेटे मुकेश कुमार सजेले ने मंगलधाम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन कराया।--