सुप्रीम कोर्ट से पहले CEC चेयरमैन ने किया निरीक्षण, बोले फिलहाल स्थिति शून्य, अवैध रेत खनन पर सख्ती
क्या मध्यप्रदेश के मुरैना चंबल में अब सचमुच रेत माफिया पर लगाम लग गई है? सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पहली बार केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति यानी CEC के चेयरमैन खुद चंबल पहुंचे और जमीनी हालात का जायजा लिया। घाटों का निरीक्षण किया, अधिकारियों से समीक्षा बैठक की और कहा कि फिलहाल अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी रोक दिखाई दे रही है। हालांकि 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। दिल्ली से आए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के चेयरमैन चंद्रप्रकाश गोयल ने सबसे पहले मुरैना जिले के राजघाट और बरवासिन घाट का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने वन विभाग और पुलिस द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरों तथा कंट्रोल रूम की व्यवस्था को करीब से देखा।
इसके बाद मुरैना में मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं वन अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में चंबल नदी की निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एआई आधारित हाईटेक सर्विलांस सिस्टम लगाने का निर्णय लिया गया। इसके तहत खनिज विभाग, वन विभाग और एनएचएआई को आधुनिक कैमरे स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों ने बताया कि चंबल क्षेत्र में वन विभाग की 16 नई चौकियां बनाई जा रही हैं। इनमें 10 मुरैना, 4 श्योपुर और 2 भिंड में स्थापित होंगी। वहीं मुरैना और धौलपुर में एआई आधारित निगरानी प्रणाली के लिए 32 हाईटेक कैमरे भी पहुंच चुके हैं।
गौरतलब है कि चंबल नदी में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को कड़ी फटकार लगा चुका है। अब 22 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई से पहले CEC का यह निरीक्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CEC चेयरमैन चंद्रप्रकाश गोयल ने कहा कि तीनों राज्य सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। फिलहाल चंबल में अवैध रेत उत्खनन की स्थिति शून्य है। यदि यही व्यवस्था आगे भी बनी रही तो चंबल नदी का पर्यावरण और यहां का वन्यजीवन सुरक्षित रहेगा। अब सबकी निगाहें 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और उसके बाद की कार्रवाई पर टिकी हैं।