बिजली बहाल कराने तहसील पहुंचे ग्रामीण, 20 दिन से अंधेरे में आदिवासी गांव! विद्युत विभाग पर आरोप
पिछले 20 दिनों से बिजली आपूर्ति बंद होने से ग्रामीणों का सब्र टूट गया। सोमवार को बड़ी संख्या में एमपी के छतरपुर जिले की बकस्वाहा तहसील के ग्राम अमोदा में आदिवासी महिलाएं और ग्रामीण तहसील कार्यालय पहुंचे और प्रभारी तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर तत्काल बिजली बहाल कराने की मांग की। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग पर मनमानी और उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के अधिकांश परिवार आदिवासी हैं और कई लोग मजदूरी के लिए दूसरे शहरों में गए हुए हैं। उनका दावा है कि गांव के लगभग 60 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बिजली बिल का भुगतान कर दिया है, इसके बावजूद पूरे गांव की बिजली काट दी गई है। इससे बच्चों की पढ़ाई, दैनिक जीवन और ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है।
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि उनके घर और झोपड़ियां जंगल से सटे हुए हैं। बरसात के मौसम में सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतु अक्सर घरों में घुस आते हैं। रात में बिजली नहीं होने के कारण हर समय किसी बड़े हादसे का डर बना रहता है। उनका कहना है कि पिछले 20 दिनों से पूरा गांव अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर है।
वहीं इस मामले में बकस्वाहा विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता राजेश गुप्ता का कहना है कि गांव के 50 प्रतिशत से कम उपभोक्ताओं द्वारा बिजली बिल जमा किए जाने के कारण पूरे गांव की बिजली आपूर्ति बंद की गई है। हालांकि ग्रामीण इस दावे से असहमत हैं और उनका कहना है कि अधिकांश उपभोक्ता पहले ही बिल जमा कर चुके हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्या लेकर बिजली कार्यालय पहुंचे तो कर्मचारियों ने यह कहकर लौटा दिया कि जब तक पूरा बकाया जमा नहीं होगा, तब तक बिजली चालू नहीं की जाएगी। प्रभारी तहसीलदार सुनील केवट ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच और संबंधित विभाग से चर्चा कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ग्रामीण महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि अंधेरे के कारण किसी प्रकार की जनहानि या अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग की होगी। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई और बिजली आपूर्ति बहाल होने पर टिकी है।