स्कूल शिफ्ट हुई तो कैसे पढ़ पाएंगी, कैसे जा पाएंगी बेटियां, स्कूल शिफ्टिंग का जमकर विरोध
कई स्कूलों को बाहर शिफ्ट किया जा रहा है जिसमें सरकारी गर्ल्स स्कूल भी शामिल है। प्रशासन के इस निर्णय को लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। बड़ी संख्या में स्कूलों के बच्चे, शिक्षक और उनके परिजन कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। छात्राओं का कहना है की इतनी दूर स्कूल शिफ्ट कर देना आखिर कहां तक मुनासिब है। कई बच्चियों को इससे परेशानी उठानी पड़ेगी। हम बात कर रहे हैं उज्जैन जिले की। जहां स्कूलों को शहर से दूर शिफ्ट करने पर बवाल मचा हुआ है। आंदोलनकारियों का कहना है की बच्चियों को काफी परेशानी होगी। स्कूल काफी दूर पड़ेगा।
बताया जा रहा है की उज्जैन में शहर के प्रमुख गर्ल्स स्कूलों को दाऊदखेड़ी स्थानांतरित करने के प्रशासनिक प्रस्ताव के खिलाफ अब छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षकों का गुस्सा खुलकर देखने मिल रहा है। बड़ी संख्या में स्कूल ड्रेस में पहुंची छात्राओं और परिजनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया साथ ही प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपकर इस तुगलकी फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि स्कूल को शहर से इतनी दूर ले जाने से न केवल मासूम बच्चियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराएगा। बल्कि उनकी रोजमर्रा की पढ़ाई और स्कूल में उपस्थिति भी बुरी तरह प्रभावित होगी।
बताया गया की सराफा कन्या स्कूल और महाकाल मैदान स्कूल समेत अन्य सरकारी स्कूलों को दाऊदखेड़ी शिफ्ट किए जाने के विरोध में आक्रोशित लोग एसडीएम एल.एन. गर्ग के पास पहुंचे और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा काजल माली ने दर्द बयां करते हुए कहा की पढ़ाई के मंदिर शहर से बाहर करने से बेटियों का रोज का सफर बेहद कठिन हो जाएगा। हमारी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा। सुरक्षा की कोई जवाबदारी भी नहीं है।
इसको लेकर बताया गया की बीते अप्रैल से इस फैसले का विरोध चल रहा है। दूर- दराज इलाकों और गांवों से आने वाली छात्राओं के लिए नई जगह पहुंचना काफी कठिन होगा। जो शिक्षा के नियमों और प्रावधानों के भी खिलाफ है।
मामले में एसडीएम एल.एन. गर्ग ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है की जिला शिक्षा अधिकारी से पूरे मामले में चर्चा करेंगे। जिसके बाद रास्ता निकाला जायेगा।