Sagar- किसान भाई सावधान ! मक्के की फसल में ये कीड़ा मचा रहा तबाही, ऐसे करें बचाव
सागर जिले में इस वर्ष लगभग ढाई लाख एकड़ क्षेत्र में किसानों ने मक्का की बुवाई की है। फसल अब बढ़वार के चरण में है, लेकिन इसी दौरान खेतों में कीटों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ने लगा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल की नियमित निगरानी करें और किसी भी प्रकार के कीट या खरपतवार दिखाई देने पर तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाएं, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
सागर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के.एस. यादव ने बताया कि मक्का की फसल में शुरुआती समय में खरपतवार और बाद के चरण में इल्ली का प्रकोप सबसे बड़ी समस्या बनता है। उन्होंने कहा कि छोटे किसान खरपतवार नियंत्रण के लिए साइकिल हैंड या कुलफा जैसे कृषि उपकरणों का उपयोग करें। यदि इससे भी खरपतवार नियंत्रित न हों, तभी आवश्यकता अनुसार रासायनिक खरपतवार नाशकों का प्रयोग करें।
उन्होंने बताया कि फसल के बढ़ने के साथ ही फॉल आर्मीवर्म नामक खतरनाक कीट का खतरा बढ़ जाता है। यह कीट पौधे की पत्तियों के बीच बने गुच्छे में छिपकर पहले अंदर से पौधे को नुकसान पहुंचाता है और बाद में बाहर निकलकर पूरी पत्तियों को चट कर देता है। इसकी तेजी से अंडे देने की क्षमता के कारण संक्रमण बहुत कम समय में पूरे खेत में फैल सकता है।
डॉ. यादव के अनुसार, यदि कीट का प्रकोप शुरुआती अवस्था में दिखाई दे तो किसान नीम का तेल, निमास्त्र या ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक कीटनाशकों का छिड़काव कर सकते हैं। इसके अलावा पौधे की गुफा (व्हॉर्ल) में थोड़ी-थोड़ी रेत डालने से भी इस कीट पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
यदि संक्रमण अधिक बढ़ जाए, तो किसानों को वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार क्लोरेंट्रानिलिप्रोल, एमामेक्टिन बेंजोएट, स्पिनेटोराम, इंडोक्साकार्ब और क्लोरफेनापायर जैसी अनुशंसित दवाओं का ही उपयोग करना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करते रहें और समय रहते उचित उपाय अपनाएं, ताकि मक्का की फसल सुरक्षित रहे और बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके।