तिरपाल के सहारे पढ़ाई कर रहे बच्चे, जिम्मेदार हैं बेपरवाह, क्या किसी हादसे के इंतजार में शिक्षा विभाग !
जर्जर भवन, छतों से टपकता हुआ पानी, दीवारों में गहरी दरारें हर समय यही ख़तरा की कहीं कोई हादसा न हो जाए। दांव पर मासूम बच्चों की जान, लेकिन जिम्मेदार हैं की ध्यान देते ही नहीं, ये तस्वीर उस बदहाल स्कूल की है जहां तिरपाल के सहारे मासूम बच्चों की पढ़ाई हो रही है। हद तो ये है की साल भर पहले ही स्कूल की छत का हिस्सा गिर गया था लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं। मामला एमपी के सिवनी जिले का है। जहां घंसौर के संकुल भिलाई अंतर्गत उन्नयन स्कूल हिरणभाटा में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। हादसे का अंदेशा बना रहने से मासूम बच्चों की जान खतरे में रहती है। लेकिन इसी तरह से बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं।
यहां सबसे बड़ा सवाल ये है की क्या शिक्षा विभाग किसी हादसे के इन्तजार में है समय रहते कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाये जा रहे।
जानकारी के मुताबिक स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। कई जगहों से छत टपक रही है। दीवारों में गहरी दरारें हैं। बारिश से बचाने कक्षाओं में तिरपाल लगाकर पढ़ाई कराई जा रही है। बताया गया की पिछले साल स्कूल की छत का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया था। उस समय करीब 12 बच्चे बाल-बाल बच गए थे। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था। लेकिन हैरानी की बात ये है की एक साल बीत जाने के बाद भी न तो भवन की मरम्मत कराई गई। न ही नए भवन के निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।
ग्रामीणों का कहना है की शिक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा की समय रहते उचित व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मामले में BRCC कमलेश कुमार बघेल का कहना है की सम्बंधित संस्था प्रमुख को कक्षाएं लगाने की वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही गयी है। किसी प्राइवेट जगह पर पढ़ाई कराने की बात कही गई है।------ देखने वाली बात होती है की आखिर इस समस्या को कब तक दूर किया जाता है।------