मरीज खाट पर, बच्चे कीचड़ में... विकास से कोसों दूर बखारी माल रैयत, 21वीं सदी में भी सड़क का इंतज़ार!
विकास के दावों की हकीकत दिखाती एक तस्वीर सामने आई है। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के घंसौर विकासखंड के बखारी माल रैयत गांव में आज भी ग्रामीण पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बारिश आते ही गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। बीमार मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए आज भी खाट का सहारा लेना पड़ता है, जबकि स्कूली बच्चों को रोजाना कीचड़ और फिसलन से भरे रास्तों पर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। ग्राम पंचायत धूमामाल के अंतर्गत आने वाले इस गांव तक पहुंचने के लिए करीब 7 किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता है। बारिश के मौसम में यह रास्ता पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है। ऐसे में न तो एंबुलेंस गांव तक पहुंच पाती है और न ही अन्य वाहन। किसी के बीमार होने पर ग्रामीण मजबूरी में उसे खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाते हैं।
गांव के छात्र-छात्राओं की मुश्किलें भी कम नहीं हैं। उन्हें रोजाना इसी दुर्गम रास्ते से पैदल चलकर केदारपुर स्थित स्कूल पहुंचना पड़ता है। कई बार बारिश और फिसलन के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सांसद और विधायक सहित संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिए। इतना ही नहीं, कई बार आंदोलन और प्रदर्शन भी किए, लेकिन वर्षों बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण उनका गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर है। सड़क नहीं होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अब सवाल यह है कि आखिर बखारी माल रैयत के लोगों को पक्की सड़क कब मिलेगी? क्या विकास के दावे इस गांव तक भी पहुंचेंगे या फिर यहां के लोग आने वाले वर्षों तक इसी तरह बदहाल रास्तों पर संघर्ष करते रहेंगे? यह सवाल आज भी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने खड़ा है।