Sagar- कम लागत में बंपर कमाई! किसानों की पहली पसंद बनी सेम की खेती
सागर जिले के किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर अधिक मुनाफा देने वाली सेम की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। जुलाई-अगस्त में लगाई जाने वाली यह फसल सितंबर-अक्टूबर से उत्पादन देना शुरू कर देती है और अच्छी देखभाल होने पर मार्च-अप्रैल तक लगातार फलियां देती रहती है।
सागर में उगाई गई सेम की सप्लाई केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, नागपुर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, कानपुर, लखनऊ और चित्रकूट जैसे बड़े शहरों तक होती है। सीजन की शुरुआत में किसानों को थोक बाजार में 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक कीमत मिलती है, जबकि अंत में भी करीब 20 रुपये प्रति किलो का भाव मिलता है।
कृषि विज्ञान केंद्र, सागर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के.एस. यादव के अनुसार, जवाहर सेम-1, जवाहर सेम-2, जवाहर सेम-17, काशी हरितमा और अर्का स्वागत जैसी उन्नत किस्में किसानों के लिए लाभदायक हैं। इनकी फलियां 50 से 70 दिनों में आने लगती हैं।
उन्होंने बताया कि एक एकड़ के लिए करीब 5 किलो बीज पर्याप्त होता है। मेड़-नाली पद्धति और बांस के सहारे बेल चढ़ाने से उत्पादन बढ़ता है। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है।