नगर निगम के सर्वे पर भड़के पथ विक्रेता, बोले- बिना सूचना कार्रवाई, छोटे व्यापारियों के अधिकारों से खिलवाड़
एमपी के उज्जैन में नगर निगम द्वारा किए जा रहे पथ विक्रेताओं के सर्वे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नेशनल हॉकर फेडरेशन और हाथ ठेला फुटपाथ व्यापारी संघ ने निगम की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के पदाधिकारियों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना और पारदर्शी प्रक्रिया के सर्वे कराया गया, जिसमें कई सक्रिय पथ विक्रेताओं के नाम जानबूझकर शामिल नहीं किए गए। इसे लेकर पथ विक्रेताओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
नेशनल हॉकर फेडरेशन के उज्जैन जिला अध्यक्ष एवं टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) के अध्यक्ष अर्जुन कहार ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र सरकार द्वारा पथ विक्रेताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाया गया था। इसके बावजूद आज भी इस कानून का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन लंबे समय से नगर निगम से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक पथ विक्रेताओं के अधिकारों को लागू करने की मांग करता आ रहा है।
अर्जुन कहार का आरोप है कि नगर निगम के वसूली अधिकारी द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना या आधिकारिक नोटिस के अचानक सर्वे कराया गया। इस सर्वे में संघ के कई सक्रिय सदस्यों के नाम शामिल नहीं किए गए, जिससे पथ विक्रेताओं में असंतोष और आक्रोश बढ़ गया है।
वहीं, हाथ ठेला फुटपाथ व्यापारी संघ के जिला महामंत्री संजय सिंह चौहान ने भी निगम प्रशासन की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया। उनका कहना है कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए इस तरह का सर्वे करना गरीब और छोटे व्यापारियों के अधिकारों का हनन है। यदि सर्वे निष्पक्ष तरीके से नहीं किया गया, तो इसका सीधा नुकसान उन लोगों को होगा, जिनकी आजीविका पूरी तरह फुटपाथ पर व्यापार पर निर्भर है।
संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वे प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, सभी पात्र पथ विक्रेताओं को शामिल किया जाए और पथ विक्रेता कानून का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो पथ विक्रेता आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।