Sagar -निगम और जनप्रतिनिधि जिस झील पर इतराते, करोड़ों खर्च के बाद भी यह दुर्दशा
लाखा बंजारा झील का 100 करोड़ की लागत से सौंदर्य कारण होने के बाद से यहां के जनप्रतिनिधि और नगर निगम जिसको लेकर इतराते है और अपनी शान बताते हैं इसकी तारीफ करते हुए नहीं थकते हैं और शहर वासियों का भी दोबारा से जुड़ाव इस झील से हो रहा है यह क्षेत्र पर्यटक स्थल के रूप में भी उभर कर सामने आया है लेकिन झील में किए गए कार्यों की धीरे-धीरे ढहने ललगे है,
मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपए की वसूली होने के बाद भी हाल यह है कि कहीं फर्श की फर्शिया टूट रही है तो कहीं घाटो की सीढ़िया पूरी तरह से बिखर रही है, बैठने के लिए जो कुर्सियां बनाई गई थी वह भी धीरे-धीरे टूट कर गायब होते जा रहे हैं, शो लाइट शोपीस बन गई, बच्चों के लिए लगाए उपकरण चलने से पहले खराब हो गए, लेकिन यहां जो शुरुआत से ही सबसे बड़ी समस्या देखने को मिल रही है वह स्ट्रीट लाइट है हफ्ते हफ्ते दो दो हफ़्ते यह लाइटे बंद रहती हैं. पूरा इलाका शाम होते ही अंधेरे में डूब जाता है
कई बार शिकायत करने के बाद भी यह स्ट्रीट लाइट जलती नहीं है कॉरिडोर का भी यही हाल है यहां पर भी एक तरफ की स्ट्रीट लाइट पिछले 10 12 दिन से बंद है लेकिन चकरा घाट से शुरू होकर विट्ठल घाट बाल भोलेनाथ गणेश घाट तक सबसे ज्यादा रस रहता है खास तौर पर इस क्षेत्र में महिलाएं और लड़कियां शाम के समय परिवार के साथ घूमने के लिए आती हैं लेकिन अंधेरा होने की वजह से यह असहज महसूस करती हैं,
इतना ही नहीं इस क्षेत्र में कटर बाजी और मर्डर जैसी संगीन घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां की स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी रहती हैं और इससे भी बड़ी बात यह है कि यहां पर लोगों की निगरानी करने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं लेकिन अंधेरा होने से यह सीसीटीवी क्या करेंगे इसका जवाब निगम ही दे सकता है
Bridge ke ek side se lekar path way, chakraghat, विट्ठल मंदिर, बाल भोलेघाट, भट्टो घाट, गणेश मंदिर, पुरव्याउ, रानीपुरा तक की स्ट्रीट लाइट पिछले 15 दिन से बंद चल रही है. और यह पूरा इलाका अंधेरे में डूबा हुआ रहता है.
बता दें कि सागर झील का सौंदर्य कारण होने के बाद 10 करोड रुपए रिजर्व में रखे गए थे ताकि काम पूरा होने के ठीक बाद से अगले 5 साल तक इसका अच्छे से रख रखाव हो सके मेंटेनेंस के नाम पर हर साल 2 करोड रुपए खर्च किए जा रहे लेकिन क्या हाल है यह किसी से छिपा नहीं है निगम प्रशासन कंपनी के पर मेहरबान नजर आता है