Sagar- सुल्तानपुर से निकला सुपर सिलेक्शन बॉय ! 7 सरकारी नौकरियां हासिल कर रचा इतिहास |SAGAR TV NEWS
अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत में निरंतरता हो, तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है। सागर जिले के 29 वर्षीय सत्येंद्र दांगी ने इस बात को अपनी सफलता से साबित कर दिया है। उन्होंने एक-दो नहीं, बल्कि अब तक 7 सरकारी नौकरियों में चयन हासिल किया है। उनकी ताजा उपलब्धि आईटीआई ट्रेनिंग ऑफिसर के पद पर चयन है। वर्तमान में वे खंडवा में प्लांट असिस्टेंट के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
लेकिन यह सफलता उन्हें विरासत में नहीं मिली। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन, संघर्ष और त्याग छिपा है। सत्येंद्र के पिता महेंद्र सिंह दांगी किसान हैं। खेती के साथ उन्होंने अपने पिता को मजदूरी करते भी देखा। परिवार की आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन इन्हीं चुनौतियों ने सत्येंद्र को मजबूत बनाया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।
सबसे खास बात यह है कि सत्येंद्र ने घर पर रहकर सेल्फ स्टडी के दम पर अपनी तैयारी की। उनका मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र सिलेबस को अच्छी तरह समझना है। वे पहले पूरे सिलेबस का गहराई से विश्लेषण करते, फिर हर विषय के छोटे-छोटे नोट्स तैयार करते। इसके बाद लगातार रिवीजन, मॉक टेस्ट और प्रीवियस ईयर के प्रश्नपत्र हल करना उनकी रोजमर्रा की आदत बन गई।
तैयारी के शुरुआती दिनों में वे प्रतिदिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे। बाद में मध्य प्रदेश बिजली विभाग में टी.ओ. (ट्रांसमिशन ऑपरेटर) के पद पर चयन होने के बाद नौकरी, परिवार और पढ़ाई—तीनों के बीच संतुलन बनाना चुनौती बन गया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और रोजाना 3 से 4 घंटे नियमित अध्ययन जारी रखा। इसी निरंतरता का परिणाम रहा कि एबीएस एम्प्लॉयी सिलेक्शन बोर्ड, भोपाल द्वारा आयोजित आईटीआई ट्रेनिंग ऑफिसर परीक्षा में उनका चयन हो गया। सत्येंद्र बताते हैं कि यह ए-ग्रेड रैंक की पोस्ट है और इस उपलब्धि से उनका परिवार बेहद खुश है।
सत्येंद्र सागर जिले में नेशनल हाईवे-44 पर चितौरा के पास स्थित सुल्तानपुरा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने पांचवीं तक की पढ़ाई गांव में की। इसके बाद मिडिल स्कूल के लिए रोज करीब 3 किलोमीटर दूर बरखेड़ी जाना पड़ता था। वहीं नौवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई बमोरी बीका में की, जो उनके घर से लगभग 12 किलोमीटर दूर था। उस समय वे रोज साइकिल से स्कूल जाते थे।