हीरो बनने बैंक की नौकरी छोड़ी, 8 साल मुंबई में खाये धक्के, फिर लौटकर बने दाढ़ी वाले बाबू
कभी सेंट्रल बैंक की नौकरी, फिर फिल्मों में हीरो बनने का सपना... लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि आठ साल तक मुंबई की गलियों में संघर्ष करना पड़ा। कई रातें फुटपाथ पर गुजरीं, चने खाकर पेट भरना पड़ा। आखिरकार जब सपना अधूरा रह गया तो सागर लौटकर पंचर की छोटी-सी दुकान खोल ली। आज वही शख्स "दाढ़ी वाले बाबू" के नाम से पूरे इलाके में अपनी अलग पहचान रखता है।
सागर के बाबू मिश्रा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उन्होंने करीब छह साल तक सेंट्रल बैंक में नौकरी की। बंडा शाखा में पदस्थ रहने के दौरान मैनेजर से विवाद हुआ तो उन्होंने बिना ज्यादा सोचे नौकरी छोड़ दी। उस समय उनके पास सिर्फ 7,000 रुपये की बचत थी, लेकिन फिल्मों में हीरो बनने का जुनून इतना था कि उसी रकम के सहारे मुंबई पहुंच गए।
मुंबई में शुरुआत में बड़े भाई ने डेढ़ महीने तक साथ दिया, लेकिन बाद में घर से निकाल दिया। इसके बाद बाबू मिश्रा ने आठ दिन तक फुटपाथ पर रहकर सिर्फ चने खाकर गुजारा किया। संघर्ष के बीच एक व्यक्ति ने उन्हें गोदाम में 600 रुपये महीने की नौकरी दिला दी। खर्च बचाने के लिए वे दिनभर में सिर्फ एक बार खाना खाते थे और इसी तरह आठ साल तक मुंबई में संघर्ष करते रहे। लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी हीरो बनने का सपना पूरा नहीं हो सका।
आखिरकार 1998 में बाबू मिश्रा सागर लौट आए और पंचर बनाने की दुकान शुरू की। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे काम चल निकला। पैसों की तंगी के कारण उन्होंने दाढ़ी कटवाना बंद कर दिया। समय के साथ यही मजबूरी उनका शौक बन गई और आज उनकी लंबी दाढ़ी उनकी पहचान बन चुकी है।