मूंग पर मुनाफे की जंग या सेहत से खिलवाड़ ? MP में खेती का बदलता सच, किसान बोले- हम खुद नहीं खाते !

 

मध्यप्रदेश में मूंग की खेती को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ किसान सरकार से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और इसे अपनी मेहनत का उचित दाम दिलाने की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कृषि विशेषज्ञों ने मूंग उत्पादन में बढ़ते रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है। किसानों का कहना है कि एक एकड़ में मूंग उत्पादन पर करीब 12 हजार रुपए तक की लागत आती है और औसतन 7 क्विंटल तक उत्पादन होता है। खुले बाजार में करीब 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से किसान को लगभग 28 हजार रुपए मिलते हैं, यानी करीब 14 हजार रुपए का फायदा होता है। लेकिन किसान अब सरकार से मूंग को 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई पेट की नहीं, बल्कि बेहतर मुनाफे की है।

 

 

लेकिन इसी मूंग उत्पादन के पीछे एक चिंताजनक तस्वीर भी सामने आ रही है। प्रदेश के नर्मदापुरम संभाग में बड़ी मात्रा में मूंग की खेती की जाती है, जहां जल्दी फसल तैयार करने और ज्यादा उत्पादन लेने के लिए किसान कई बार कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई किसानों का दावा है कि बाजार में बेचने के लिए तैयार की जा रही मूंग में रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ किसानों ने यह तक कहा कि वे खुद इस मूंग को खाने से बचते हैं।

 

 

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसल को जल्दी पकाने और कीटों से बचाने के लिए बार-बार कीटनाशक डालने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि लगातार रासायनिक उपयोग से जमीन की उर्वरक क्षमता कम होने और स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। नर्मदापुरम क्षेत्र में किसानों द्वारा की जा रही इस तरह की खेती को लेकर कृषि विभाग भी चिंता जता चुका है। अधिकारियों का कहना है कि संतुलित खेती और जैविक तरीकों को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी और मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित रह सके।

 

 

वहीं किसानों का तर्क है कि अगर कम लागत में सुरक्षित तरीके से खेती करनी है तो उन्हें बेहतर बाजार और उचित दाम की जरूरत है। अब सवाल यह है कि मूंग की खेती में बढ़ता उत्पादन और मुनाफे की दौड़ किसानों के लिए वरदान साबित होगी या भविष्य में बड़ी चुनौती बनेगी? इसका समाधान टिकाऊ खेती, वैज्ञानिक सलाह और बेहतर कृषि नीति में छिपा है।

 

 


By - sagar tv news
29-Jul-2026

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