Sagar-आस्था का महासागर ! 50 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन
सागर की पावन धरती बुधवार को आस्था, भक्ति और वैदिक परंपरा के एक ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बनी। परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार महाराज के सान्निध्य में धर्मश्री स्थित मंशापूर्ण बालाजी मंदिर परिसर में विश्व का विराट "माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन" महाअनुष्ठान संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में देशभर से आए लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर लोकमंगल और विश्वशांति की कामना की।
करीब एक माह की तैयारियों के बाद आयोजित इस महाअनुष्ठान में सागर सहित मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा समेत कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन स्थल तक कई किलोमीटर लंबी वाहनों और श्रद्धालुओं की कतारें देखने को मिलीं।
करीब 20 एकड़ में फैले परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था। श्रद्धालुओं के लिए आवास, पेयजल, चिकित्सा, पार्किंग, सुरक्षा और यातायात की व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। पूरे आयोजन में 1100 वैदिक आचार्यों ने एक साथ वेदमंत्रों का उच्चारण किया। शंखनाद, घंटानाद और "जय माँ राजराजेश्वरी" के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
महाअनुष्ठान का मुख्य आकर्षण रहा हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन, जिसमें हल्दी और कुमकुम के माध्यम से माँ राजराजेश्वरी की विशेष आराधना की गई। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वशांति, सुख-समृद्धि और मानव कल्याण का सामूहिक संकल्प भी रहा।
देशभर से विशेष पूजन सामग्री मंगाई गई। 100 क्विंटल हरिद्रा, 31 हजार नारियल, 11 हजार कमल पुष्प, एक लाख दीप, लाखों बिल्वपत्र, गंगाजल, नर्मदा जल सहित अनेक धार्मिक सामग्री माँ के चरणों में अर्पित की गई।
सायंकाल एक लाख दीपों से सजी भव्य महाआरती ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।
इस अवसर पर परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार महाराज ने कहा कि माँ राजराजेश्वरी की उपासना केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र और समस्त मानवता के कल्याण का संकल्प है। सागर में आयोजित यह महाअनुष्ठान सनातन संस्कृति की भव्यता, अनुशासन और जनआस्था का ऐसा अद्वितीय संगम बन गया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।