सागर- हाई रिस्क प्रेगनेंसी की होगी सख्त मॉनिटरिंग, मातृ-शिशु मृत्यु दर पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन
सागर जिले में मातृ मृत्यु दर एमएमआर और शिशु मृत्यु दर आईएमआर को कम करने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। खुरई के सरदार वल्लभभाई पटेल ऑडिटोरियम में आयोजित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले को स्पष्ट संदेश दिया कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। हाई रिस्क प्रेगनेंसी की समय पर पहचान, सतत मॉनिटरिंग और शत-प्रतिशत सटीक डेटा एंट्री सुनिश्चित करना हर स्वास्थ्य कार्यकर्ता की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
खुरई और मालथौन ब्लॉक के लिए आयोजित सुमन पंचायत एवं त्रैमासिक टीकाकरण समीक्षा बैठक में सीएचओ, एएनएम, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। बैठक के दौरान पूर्व में सामने आई मैदानी त्रुटियों की केस स्टडी पर विस्तार से चर्चा हुई, ताकि भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति न हो और हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को समय रहते बेहतर उपचार मिल सके।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि जिन राज्यों और जिलों ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई है, उनके पास भी लगभग वही संसाधन और मानव बल है जो हमारे पास उपलब्ध हैं। फर्क केवल कार्य की गुणवत्ता, संवेदनशीलता और समय पर फॉलो-अप का है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों से कहा कि हर गर्भवती महिला की नियमित निगरानी करें और किसी भी जोखिम वाले मामले को नजरअंदाज न करें।
कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि प्रसव से पहले ही गर्भवती महिलाओं के सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे समग्र आईडी, आधार कार्ड, विवाह प्रमाण पत्र और बैंक खाते की जानकारी पूरी कर ली जाए। इससे प्रसव के बाद मिलने वाली सरकारी सहायता राशि समय पर और बिना किसी बाधा के लाभार्थी तक पहुंच सकेगी। बैठक में टीकाकरण अभियान की भी समीक्षा की गई और स्वास्थ्य अमले को निर्देश दिए गए कि कोई भी पात्र महिला और नवजात टीकाकरण से वंचित न रहे। जिला प्रशासन का लक्ष्य बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से माताओं और नवजातों को सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना है।