नशे के खिलाफ पूरे गांव ने छेड़ी जंग! दिवेल के ग्रामीणों ने शराब की दुकान बंद कराने का उठाया बीड़ा
एमपी के उज्जैन जिले की खाचरौद तहसील के दिवेल गांव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो पूरे समाज के लिए मिसाल बन सकती है। जहां एक ओर नशे की लत युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है, वहीं दूसरी ओर दिवेल गांव के लोगों ने इस बुराई के खिलाफ एकजुट होकर बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने न सिर्फ नशामुक्त गांव का संकल्प लिया है, बल्कि बिना लाइसेंस संचालित हो रही कथित शराब की दुकान को बंद कराने की मांग भी प्रशासन से की है।
दिवेल गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में आबकारी विभाग पहुंचे और आबकारी अधिकारी विजय मेणा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि गांव में बिना लाइसेंस शराब की दुकान संचालित की जा रही है, जिससे कई लोग शराब की लत का शिकार हो चुके हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि इस दुकान को तत्काल बंद किया जाए और गांव में किसी भी प्रकार की शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि नशे की वजह से कई परिवार टूट रहे हैं और सबसे ज्यादा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। इसलिए अब पूरा गांव इस सामाजिक बुराई के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का फैसला कर चुका है। ग्रामीण जीवन सिंह गुर्जर ने बताया कि गांव में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को नशे के दुष्परिणाम समझाए जा रहे हैं और युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की जा रही है। इस अभियान में गांव के बुजुर्ग, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि समाज एकजुट होकर प्रयास करे तो नशे जैसी बुराई को जड़ से खत्म किया जा सकता है। उनका उद्देश्य है कि दिवेल गांव आने वाले समय में पूरी तरह नशामुक्त बने और यहां का हर युवा शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़े। दिवेल गांव की यह पहल केवल उज्जैन जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि सामाजिक बदलाव की शुरुआत समाज खुद भी कर सकता है।