ई-टोकन व्यवस्था के बाद अब हाईब्रिड मॉडल बना परेशानी,खाद के लिए लंबी लाइनें, किसान परेशान
भले ही किसान आंदोलन हो गया हो, किसानों को आश्वासन दिया गया हो, लेकिन अभी भी किसानों की समस्याएं कम होती हुई दिखाई नहीं दे रही हैं। अभी भी खाद लेने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ई-टोकन व्यवस्था की जगह शुरू हुई हाइब्रिड मॉडल व्यवस्था से किसानों में गुस्सा है। ये आरोप हम नहीं लगा रहे, बल्कि खुद किसानों ने लगाए हैं। तस्वीरें नर्मदापुरम जिले की हैं।
दरअसल, किसान आंदोलन के बाद सरकार ने ई-टोकन व्यवस्था की जगह नर्मदापुरम जिले में हाइब्रिड मॉडल से किसानों को खाद वितरण की व्यवस्था की है। बावजूद इसके, परेशानी कम नहीं हुई। पीओएस सिस्टम से खाद लेने पहुंचे किसानों को तीन बार लाइन में लगना पड़ रहा है। पहली लाइन दस्तावेज जमा करने की है। दूसरी लाइन में लगने के बाद किसानों को ओटीपी मिलता है और तीसरी लाइन में लगने के बाद किसान खाद की कीमत चुकाकर अपना बिल कटवाता है। इसके बाद किसान को डीएपी और यूरिया लेने के लिए दो अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है। तब जाकर कहीं उसे अपने हिस्से का खाद नसीब हो पाता है। ई-टोकन सिस्टम में यह विसंगति है कि रकबे के अनुपात में किसान को खाद का आवंटन नहीं मिल पाता।
बताया गया कि किसान आंदोलन की दूसरी सबसे बड़ी मांग यही थी कि ई-टोकन व्यवस्था को हटाया जाए। सरकार ने इसे हटाया भी और हाइब्रिड मॉडल विकसित किया है, जिसमें ई-टोकन और पीओएस, दोनों जरिए से खाद प्राप्त की जा सकती है। लेकिन किसानों का कहना है कि ई-टोकन में रकबे के अनुपात में खाद वितरण का आवंटन किया जाए।
मामले में जिला प्रबंधक मार्कफेड अनिल जैन का कहना है कि जिले में खाद की कोई परेशानी नहीं है।