सागर- बेटियां हों तो ऐसी! दिवंगत अधिवक्ता राजेन्द्र सोनी की 1303 कानूनी किताबें न्यायालय को दान
सागर जिले के गढ़ाकोटा से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। अक्सर कहा जाता है कि बेटियां अपने माता-पिता का सबसे बड़ा सहारा होती हैं, और इस कहावत को सच साबित किया है दिवंगत वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र सोनी की बेटियों ने। उन्होंने अपने पिता की सबसे अनमोल विरासत—उनकी 1303 दुर्लभ और महत्वपूर्ण कानूनी पुस्तकों—को गढ़ाकोटा न्यायालय की लाइब्रेरी को दान कर एक मिसाल पेश की है।
स्वर्गीय राजेन्द्र सोनी ने अपने लंबे वकालती जीवन में कानून की दुर्लभ और उपयोगी पुस्तकों का विशाल संग्रह तैयार किया था। इन्हीं पुस्तकों के अध्ययन और ज्ञान के बल पर उन्होंने वर्षों तक अनेक पक्षकारों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन के बाद उनकी बेटियों श्रीमती प्रीति सोनी, श्रीमती प्रियंका सोनी और कुमारी अंकिता सोनी ने अपने भाइयों मदन गोपाल, मनोहर लाल, रामजी और सुनील सोनी के साथ मिलकर इस पूरे संग्रह को जनहित में गढ़ाकोटा न्यायालय की लाइब्रेरी को समर्पित कर दिया।
इस अवसर पर सागर रोड स्थित नवनिर्मित न्यायालय परिसर के सभागार में अधिवक्ता संघ द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में व्यवहार न्यायाधीश श्री अंबर श्रीवास्तव, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी आनंद कुमार लक्षकार, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष जमील कुरैशी, पुस्तकालय प्रभारी राजाराम कोरी सहित वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायालयीन अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने सोनी परिवार के इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ये 1303 पुस्तकें केवल कानून की किताबें नहीं हैं, बल्कि स्वर्गीय राजेन्द्र सोनी के ज्ञान, अनुभव और न्याय के प्रति समर्पण की अमूल्य धरोहर हैं। आने वाले वर्षों में यही पुस्तकें युवा अधिवक्ताओं के लिए मार्गदर्शक बनेंगी और न्याय की राह को और मजबूत करेंगी। बेटियों की इस पहल ने यह संदेश दिया है कि सच्ची श्रद्धांजलि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि ऐसे कार्यों से दी जाती है जो समाज की आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाएं।