Sagar -सिल्वर लेकर लौटी यामिनी, अब नजर गोल्ड पर… भव्य जुलूस निकाला गया
सागर की बेटी यामिनी मौर्य जब शुक्रवार को रेलवे स्टेशन पहुंचीं तो यह सिर्फ एक खिलाड़ी की घर वापसी नहीं थी, बल्कि उस सपने की जीत थी, जिसे कभी आर्थिक तंगी और सामाजिक बंदिशों के बीच पंख देना मुश्किल था। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में 57 किलोग्राम जूडो वर्ग में भारत के लिए रजत पदक जीतकर लौटी यामिनी का शहरवासियों ने ढोल-नगाड़ों और भारत माता के जयकारों के साथ भव्य स्वागत किया।
रेलवे स्टेशन से खेल परिसर तक कार रैली निकाली गई। रास्ते में जगह-जगह यामिनी का नागरिक अभिनंदन हुआ। नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने भी उनका सम्मान कर उपलब्धि की बधाई दी। यामिनी किसान पिता हरिओम मौर्य और गृहिणी मां मिथलेश मौर्य की बेटी हैं। कभी परिवार आर्थिक परिस्थितियों और सामाजिक परंपराओं के कारण उन्हें खेल परिसर भेजने को लेकर असमंजस में था। लेकिन कोच दीपक कुमार ने उनकी प्रतिभा पहचानी और परिवार को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। यहीं से शुरू हुआ सफर आज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है। यामिनी ने 2022 के राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण, 2025 के हांगकांग एशियन ओपन में पदक और 2026 के डकार अफ्रीका ओपन में स्वर्ण पदक जीता। वह दो बार सीनियर राष्ट्रीय चैंपियन भी रह चुकी हैं।
लेकिन यामिनी की नजर अब मिले हुए सिल्वर पर नहीं, बल्कि अगले गोल्ड पर है। उनका कहना है—“यह सफलता यात्रा का एक पड़ाव है, अभी गोल्ड लाना बाकी है। मेरा अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।”