सागर- नंगे पैर घर-घर पहुंचे रावतपुरा सरकार, झोली फैलाकर मांगी गौमाता के लिए एक रोटी; भावुक हुआ सेवा अभियान
सागर में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। गौसेवा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘एक रोटी गाय के लिए’ अभियान के तहत परम पूज्य श्री रावतपुरा सरकार महाराज नंगे पैर हाथों में झोली लेकर घर-घर पहुंचे और लोगों से गौमाता के लिए एक रोटी देने का आग्रह किया। नंगे पैर, हाथों में झोली और आग्रह भी सिर्फ एक रोटी का... यह दृश्य देखकर कई लोग भावुक नजर आए। अभियान के आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य सिर्फ गौवंश के लिए भोजन जुटाना नहीं, बल्कि समाज में गौसेवा के संस्कार को फिर से मजबूत करना है।
श्री रावतपुरा सरकार महाराज ने लोगों से अपील की कि घर में बनने वाली पहली रोटी गौमाता के लिए जरूर निकाली जाए। उनका संदेश है कि गौमाता अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकतीं, इसलिए समाज को उनके प्रति संवेदनशील होकर सेवा का संकल्प लेना चाहिए। सागर में निकली यह सेवा यात्रा काली तिगड्डा स्थित काली मंदिर से शुरू हुई। इसके बाद यात्रा छैल बिहारी मंदिर, बीजासेन मंदिर, गणेश घाट, राधा माधव मंदिर, गणेश मंदिर खिरका और गंगा मंदिर रानीपुरा होते हुए वापस गणेश घाट स्थित गणेश मंदिर पहुंची।
यात्रा के दौरान महाराज ने विभिन्न स्थानों पर नागरिकों से संवाद किया और उन्हें अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक रोटी भले ही छोटी लगे, लेकिन किसी भूखे जीव के लिए वही बड़ी सेवा बन सकती है। ‘एक रोटी गाय के लिए’ अभियान के जरिए लोगों को उस परंपरा की याद दिलाई जा रही है, जिसमें भोजन करने से पहले गौमाता के लिए एक हिस्सा अलग निकालने की भावना रही है।
अभियान का संदेश बेहद सरल है—अपने घर की पहली रोटी गौमाता के नाम। सागर में नंगे पैर झोली लेकर निकले रावतपुरा सरकार की इस पहल ने लोगों को गौसेवा और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया। अब देखना होगा कि यह अभियान कितने घरों तक पहुंचता है और कितने लोग रोजाना गौमाता के लिए एक रोटी निकालने का संकल्प लेते हैं। एक रोटी छोटी जरूर है... लेकिन किसी मौन जीव के लिए वही सबसे बड़ी सेवा बन सकती है।